F35 Fighter Jet: दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिने जाने वाले F-35 अक्सर चर्चा में रहता है. कभी इसकी स्टेल्थ क्षमता इसे सुर्खियों में लाती है, तो कभी इसकी संभावित रक्षा डील चर्चा का विषय बन जाती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भारत को F-35 लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का रास्ता खोलने की बात कर चुके हैं. वही सिंगापुर समेत कई देशों ने भी इस विमान को अपनी वायु सेना का हिस्सा बनाने का फैसला लिया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आसमान का सिकंदर F-35 इसके तीनों वेरिएंट्स में क्या अंतर है और यह क्यों इतना घातक माना जाता है.
F-35 A वायु सेना के लिए तैयार स्टैंडर्ड मॉडल
F-35 A इस वेरिएंट का सबसे सामान्य और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला वर्जन है. इसे पारंपरिक रनवे से लेकर टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया है. यही वजह है कि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना और कई सहयोगी देशों की एयर फोर्स करती है. इस वेरिएंट में 25 मिमी की इनबिल्ट गन लगी होती है. इसकी रेंज, पेलोड और स्पीड तीनों का संतुलन इसे बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान बनता है. यह दुश्मन की नजर से बचते हुए लंबी दूरी तक मिशन पूरा करने में सक्षम है.
F-35B जहां रनवे नहीं वहां भी उड़ान
तीनों वेरिएंट में सबसे अलग F-35B माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत शॉर्ट टेक ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग क्षमता है. यानी यह छोटे रनवे, अस्थायी एयरबस और युद्धपोत से भी उड़ान भर सकता है और लगभग हेलीकॉप्टर की तरह उतर सकता है. इस क्षमता के लिए इसमें खास लिफ्ट सिस्टम और थ्रस्ट वेक्टरिंग तकनीक दी गई है, जिससे इसकी कीमत भी बाकी दोनों वेरिएंट की तुलना में ज्यादा हो जाती है. यही तकनीकी इसे अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के लिए उपयोगी बनाती है. ब्रिटेन, जापान और इटली जैसे देश भी इस वर्जन का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इस एक्स्ट्रा तकनीक की वजह से इसमें ईंधन क्षमता अपेक्षाकृत कम है, जिससे इसकी ऑपरेशनल रेंज भी F-35A और F-35C से कम रहती है.
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F-35C एयरक्राफ्ट कैरियर का सबसे ताकतवर हथियार
F-35C को खासतौर पर विमान वाहक पोतों पर तैनाती के लिए विकसित किया गया है. यही कारण है कि इसका डिजाइन बाकी दोनों वर्जन से काफी अलग दिखाई देता है. इसमें बड़े और फोल्ड होने वाले पंख दिए गए हैं, जिससे विमान को एयरक्राफ्ट कैरियर के सीमित हैंगर में आसानी से रखा जा सके. बड़े विंग की वजह से यह कम गति पर भी अच्छे से नियंत्रण बनाए रखता है जो कैरियर पर लैंडिंग के दौरान बहुत जरूरी होता है. इसके अलावा इसमें मजबूत लैंडिंग गियर, दो पहिया वाला नोज गियर और ज्यादा मजबूत ढांचा दिया गया है, ताकि कैटापुल्ट लॉन्च और अरेस्टिंग वायर की मदद से होने वाली कठिन लैंडिंग का दबाव आसानी से झेला जा सके.
तीनों वेरिएंट में सबसे बड़ा अंतर क्या?
तीनों वेरिएंट F-35 एक ही प्लेटफार्म पर आधारित है और सभी में स्टाइल, तकनीक, एडवांस सेंसर, नेटवर्क केंद्रित युद्ध प्रणाली और आधुनिक एवियोनिक्स मौजूद है, लेकिन उनकी भूमिका अलग-अलग है. F-35A पारंपरिक एयर बेस में ऑपरेशन के लिए सबसे उपयुक्त है. F-35B उन इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है, जहां लंबे रनवे उपलब्ध नहीं है, जबकि F-35C को पूरी तरह एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
