23 नवंबर को दिल्ली के प्रेम नगर इलाके में पिटबुलडॉग ने 6 साल के बच्चे पर हमला कर के जख्मी कर दिया. घटना के CCTV में पिटबुल से बचने के लिए बच्चा दौड़ता है, लेकिन पिटबुल उसे गिरा देता है और दाहिना कान काटकर अलग कर देता है. हैरत की बात है कि जो जानवर 20 हजार साल पहले से इंसानों का वफादार दोस्त रहा है, अब वही सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है. जी हां... सही सुना आपने. इंसानों और कुत्तों की दोस्ती हजारों सालों पुरानी है, तब कुत्ते, भेड़िया हुए करते थे. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि भेड़िये से कुत्ते कैसे बने, इंसानों और कुत्तों की दोस्ती की दास्तां क्या और अब दुश्मनी क्यों बढ़ रही है...

सवाल 1- भेड़ियों का ट्रांसफॉर्मेशन कैसे हुआ, जो वह कुत्ते बन गए?जवाब-साइंटिफिकअमेरिकन की रिसर्च रिपोर्ट 'हाउवोल्फबिकमडॉग' के मुताबिक, करीब 45 हजार साल पुरानी बात है, जब आइसएज यानी बर्फ से ढंकी धरती का आखिरी दौर चल रहा था. इंसानों की आबादी धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी. साथ ही पेड़-पौधे और तमाम जानवर सतह पर आने लगे थे. वैज्ञानिकों ने इस समय को नाम दिया है 'प्लेस्टोसीन'.

प्लेस्टोसीन के दौर में प्राचीन भेड़िए भी फले-फूले. इन भेड़ियों को खाने के लिए मांस की तलाश रहती थी, लेकिन धरती अब भी ठंडी थी तो शिकार के लिए छोटे जानवरों को ढूंढना मुश्किल होता था. वैज्ञानिकों का दावा है कि इसी में से कुछ भेड़िए जो कम डरपोक थे, इंसानों की बस्ती के पास जाने लगे. वहां इंसानों के इस्तेमाल के बाद बची हुई हड्डियां और मांस इन भेड़ियों को आसानी से मिल जाते. यहीं से इंसानों से इनका शुरुआती संपर्क हुआ.

इंसानों के साथ आकर रहने से भेड़ियों के DNA में काफी बदलाव हुए...

  • जंगल में शिकार न करने से उनका आकार बदलने लगा.
  • दांत कम नुकीले होने लगे. हड्डियों और जबड़ों का आकार भी बदलने लगा.
  • कुत्तों के कान लटके हुए और पूंछ पतली और घुंघराली हो गई. पैर भी छोटे हो गए.
  • एशिया में कुत्तों की प्रजातिग्रेवुल्फ’ से निकली है, जबकि अफ्रीका में ‘सियार’ की प्रजाति से कुत्ते बने हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि 15 हजार से 20 हजार साल पहले भेड़ियों से कुत्ते विकसित हुए होंगे और इंसानों के साथ रहने लगे होंगे. 2015 में साइबेरिया में 35 हजार साल पुरानी पसली की हड्डी मिली थी. वैज्ञानिकों ने इसे कुत्तों और भेड़ियों के साझा पूर्वज के अवशेष बताए.

सवाल 2- इंसानों और कुत्तों की दोस्ती कैसे हुई और कुत्ते वफादार कैसे बन गए?जवाब- इतिहासकार और लेखक युवालनोआहहरारी ने अपनी किताब 'सेपियन्स: अ ब्रीफहिस्ट्री ऑफ ह्यूमनकाइंड' में लिखा है, '15,000 साल पहले इंसानों ने सबसे पहले कुत्ते को पालतू बनाया था. इसके कई सबूत मौजूद हैं. इन भेड़ियों से बने कुत्तों का इस्तेमाल इंसान शिकार और लड़ाई लिए करता था. घुसपैठियों से लड़ाई में भी ये इंसानों की मदद करते थे. जैसे-जैसे इंसान और कुत्तों की पीढ़िया गुजरती गईं, दोनों के बीच रिश्ता मजबूत होता गया. ये एक दूसरे से संवाद करने लगे.'

कुत्तों को बाकी जानवरों से सुरक्षा और आसानी से खाना मिल जाता था. कुत्ते इंसान के साथ अपनी जिंदगी को भी सुरक्षित देखने लगे. हजारों सालों में दोनों के बीच एक समझ विकसित हो गई. इसकी वैज्ञानिक वजह पर गौर करें तो जब कुत्ते आंखों में देखते हैं तो इंसान के शरीर में ऑक्सीटोसिनहार्मोनरिलीज होता है, जिसे 'प्यार का हार्मोन' भी कहा जाता है. कुत्तों के साथ भी ऐसा होता है. कई सभ्यताओं में तो इंसानों के साथ कुत्तों को पूरे विधि-विधान से दफनाने का साक्ष्य मिलता है.

1914 में जर्मनी के बॉन शहर में मजदूरों को एक 14 हजार साल पुरानी कब्र मिली. इसमें एक पुरुष-महिला के साथ कुत्ते के पिल्ले को भी दफनाया गया था. इसे कुत्ते को इंसान के साथ दफनाने की सबसे पुरानी घटना मानी जाती है.

 

एक कब्र में महिला और कुत्ते की हड्डियां मिलीं, जिसमें दोनों को साथ दफनाया गया था.

2014 में आई एक स्टडी के मुताबिक कुत्ते इंसान की भावनाओं को महसूस कर पाते हैं. इंसान जब हंसता है या रोता है तब कुत्ते का दिमाग उस पर प्रतिक्रिया देता है. शर्त बस इतनी होती है कि किसी भी इमोशन के लिए उनके कानों तक आवाज जानी चाहिए.

सवाल 3- तो फिर इंसान और कुत्तों की दोस्ती दुश्मनी में क्यों बदल गई?जवाब- अब आते हैं उस मोड़ पर जहां दोस्ती दुश्मनी की ओर मुड़ने लगी, जिसकी सबसे बड़ी वजह बनी औद्योगिक क्रांति और शहरीकरण. ग्रामीण इलाकों में कुत्ते खुले मैदानों में रहते थे, लेकिन शहरों में जगह कम हो गई. कुत्तों को अकेलापन लगने लगा. साइंटिफिकरिपोर्ट्स की 2019 की स्टडी 'वोलव्सलीड एंड डॉग्सफॉलो, बट दे बोथकॉओपरेटविथह्यूमंस' कहती है कि डॉमेस्टिकेशन ने कुत्तों में आक्रामकता कम की, लेकिन आधुनिक तनावों ने इसे वापस ला दिया.

1990 के दशक में दिल्ली में बच्चों पर हमले के बाद अधिकारियों ने हजारों कुत्तों को जहर दिया, लेकिन इस क्रूरता ने परेशानी बढ़ा दी. कुत्ते डर गए और डर गुस्से में बदल गया. हिस्ट्री चैनल की डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, इंसानी आक्रामकता से कुत्ते टेरिटोरियल बन जाते हैं. अमेरिका में आवारा कुत्ते इंसानों को शिकार समझते हैं और भारत में भी यह ट्रेंड समान है.

पशुपालन और डेयरी विभाग 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में कुल 26.99 लाख से ज्यादा एनिमलबाइट दर्ज हुए. इनमें 21.95 लाख यानी करीब 81.33% मामले सिर्फ डॉगबाइट के थे.

सवाल 4-इंसानों के वफादार कुत्ते उन्हीं की जान के दुश्मन कैसे बन गए?जवाब- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंसएजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता ने कुत्तों का स्वभाव बदलने पर रिसर्च की है. रिसर्चरअनिंदिता भद्रा कहती हैं, 'कुत्तों का स्वभाव स्थान, समय और परिस्थिति के हिसाब से बदल जाता है.'

रिसर्च में आवारा और पालतू कुत्तों को शामिल किया गया था, जिसमें 3 पहलू निकलकर सामने आए हैं...

1. संख्या बढ़ना और संसाधनों की कमी: एक मादा कुत्ता साल में 20 बच्चे पैदा कर सकती है. एनिमलबर्थकंट्रोल (ABC) प्रोग्राम से स्ट्रलाइजेशन होता है, लेकिन यह ठीक से नहीं हो रहा. कुत्तों के पैक (ग्रुप) बन जाते हैं. ज्यादा कुत्ते होने से खाने की कमी होती है, जिससे वह आक्रामक हो जाते हैं. वे कचरे से खाना ढूंढते हैं, लेकिन जब कम पड़ता है, तो इंसानों या जानवरों पर हमला करते हैं.

2. शहरीकरण और जगह की कमी: शहरों में बिल्डिंग्स, मॉल्स, कॉलोनियां और घर बढ़े, जिससे कुत्तों की जगह कम हुई. वह असुरक्षित महसूस करने लगे. कुत्ते मानसून में हमले ज्यादा होते हैं, क्योंकि बारिश से खाना मुश्किल हो जाता है. गरीब इलाकों में ज्यादा समस्या, जहां कचरा ज्यादा है और कुत्ते भी. सच कहा जाए तो काफी हद तक इंसान ही आवारा कुत्तों के हिंसक होने की वजह है.

3. इंसानी व्यवहार बदला: लोग कुत्तों को पीटने लगे हैं. कुत्तों को परेशान करने में इंसानों को मजा आने लगा. इससे उनके अंदर की भावना खत्म होती गई. पालतू कुत्तों को तो प्यार करते हैं, लेकिन आवारा कुत्तों पर जुल्म होता है. कभी-कभी उन्हें जिस जगह खाना मिल जाता है, वह उस जगह को अपना इलाका समझने लगते हैं. अगर कोई अजनबी आए, तो काट लेते हैं. पालतू कुत्तों को सड़क पर छोड़ना भी समस्या बढ़ाता है. यह कुत्ते पहले से ट्रेन नहीं होते, तो आक्रामक हो जाते हैं.

अनिंदिता के मुताबिक, सड़क के कुत्तों का सामना हर दिन कई इंसानों और जानवरों से होता है. आमतौर पर कुत्ते अपने इलाकों में रहते हैं. वह अपने आसपास रहने वाले इंसानों से पहचान बना लेते हैं. जिन कुत्तों को आप खाना देते हैं, प्यार भरा व्यवहार करते हैं, वे आपको देखकर पूंछ हिलाने लगते हैं. वहीं, जिन कुत्तों को प्रॉपर खाना नहीं मिलता, वो घूरते हैं. जिन इलाकों में कुत्ते ज्यादा होते हैं और वे भूखे रहते हैं तो आक्रामक हो जाते हैं. कुछ लोग घर के बाहर कुत्ते को देखते ही उसे पत्थर मारने लगते हैं, उसे पानी डालकर भगाने लगते हैं तो इससे आवारा कुत्ते हिंसक हो जाते हैं.

सवाल 5- कैसे जानें कि कोई कुत्ता हमला करने वाला है?जवाब- कुत्तों के व्यवहार को समझना बेहद जरूरी है, खासकर जब वे आवारा हों. उनकी हरकतें और बॉडीलैंग्वेज से हम पता लगा सकते हैं कि वे शांत हैं या आक्रामक होने वाले हैं. समय रहते इस बात की पहचान कर लेना बचाव की पहली सीढ़ी है...

  • जब कुत्ते लगातार घूरने लगें
  • जब कुत्ते गुर्राएं या दांत दिखाएं
  • जब कुत्ते पूंछ सीधी करें और सख्त हो जाएं
  • जब कुत्तों के कान खड़े हो जाएं
  • जब वह अचानक खड़े होकर आगे बढ़ना
  • दुम को ऊपर करना या हिलाना बंद कर देना

अगर किसी गली-मोहल्ले में लगे कि कुत्ता हमला कर सकता है तो घबराएं नहीं और शांत रहने की कोशिश करें. कभी भी उसकी आंखों में न देखें क्योंकि इससे कुत्ता और अग्रेसिव हो सकता है. साथ ही तेज भागने की बजाय धीरे-धीरे पीछे हटें. अपने हाथ या कोई वस्तु जैसे बैग, छड़ी या कपड़ा कुत्ते और अपने बीच में रखें ताकि वह आपको आसानी से न छू सके. अगर कुत्ता हमला कर भी दे तो गिरकर सिर और गर्दन को हाथों से ढंक लें और जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाएं. इससे समय रहते आसपास के लोग आपकी मदद के लिए आ सकते हैं.