Ethanol Blending In Petrol: इन दिनों सोशल मीडिया पर एथेनॉल को लेकर तरह तरह के वीडियो सामने आ रहे है. दावा किया जा रहा है कि ज्यादातर वीडियो फेक हैं. आजकल भी जब आप पेट्रोल पंप पर जाते होंगे तो वहां E10 या E20 लिखा हुआ जरूर दिखता होगा. इसका सीधा मतलब है कि आपकी गाड़ी में जो पेट्रोल डाला जा रहा है उसमें एथेनॉल मिला हुआ है. लेकिन क्या आपने ये सोचा है कि यह एथेनॉल आखिर पेट्रोल में कैसे मिलाया जा रहा है. क्या कोई सीधे बाल्टी में एथेनॉल लेकर पेट्रोल के टैंकर में डाल देता है, या फिर कोई और तरीका काम करता है. आइए इस तेल के खेल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को गहराई से समझते हैं.

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एथेनॉल क्या है और इसे पेटर में मिलाने की जरूरत क्यों?

बहुत आसान सी भाषा में समझा जाए तो एथेनॉल एक तरह से अल्कोहल होता है. इसको गन्ने के रस, मक्का, खराब हो चुके चावल और अनाज जैसे कृषि उत्पादों को सड़कर बनाया जाता है. भारत सरकार देश में पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने और विदेशों से खरीदे जाने वाले महंगे कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है, इसलिए पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग पर तेजी से काम कर रही है. चूंकि यह पूरी तरह से हमारे देश में खेतों में उगने वाली फसल से तैयार होता है, इसलिए इसे एक बेहतरीन स्वदेशी और हरित ईंधन माना जाता है.

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क्या डायरेक्ट पेट्रोल में मिला दिया जाता है एथेनॉल?

कई लोगों को लगता है कि एथेनॉल को सीधे पेट्रोल पंप पर बने पेट्रोल के भूमिगत टैंकों में मिला दिया जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. इसकी मिक्सिंग का पूरा खेल पेट्रोल पंप से दूर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बड़े-बड़े फ्यूल टर्मिनलों या मेन डिपो पर शुरू होता है. सबसे पहले देश की विभिन्न डिस्टिलरीज (एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियों) से बिल्कुल पानी की एक भी बूंद से रहित यानि एनहाइड्रस एथेनॉल को बेहद सुरक्षित बड़े टैंकरों के जरिए इन तेल डिपो तक पहुंचाया जाता है.

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इन-लाइन ब्लेंडिंग तकनीक

जब पेट्रोल और एथेनॉल दोनों अलग-अलग टैंकों में डिपो पर पहुंच जाते हैं, तब इनको आपस में वैज्ञानिक तरीके से मिक्स किया जाता है. इस सटीक और आधुनिक प्रक्रिया को इन-लाइन ब्लेंडिंग या स्प्लैश ब्लेंडिंग कहा जाता है. जब तेल डिपो से पेट्रोल को शहरों के पेट्रोल पंपों पर भेजने के लिए बड़े टैंकर ट्रकों में लोड किया जाता है, ठीक उसी वक्त पाइप लाइनों में लगे कंप्यूटरीकृत ब्लेंडिंग आर्म्स एक निश्चित दबाव और तय अनुपात के साथ सीधे पेट्रोल की धार में एथेनॉल को इंजेक्ट कर दिया जाता है.

कौन तय करता है E20 का सटीक अनुपात?

हालांकि यह पूरा काम ऑटोमैटिक फ्लो मीटर और कंप्यूटर सिस्टम के जरिए कंट्रोल किया जाता है. ये आधुनिक मशीनें पेट्रोल के बहाव की रफ्तार को नापकर एथेनॉल की मात्रा को इस तरह नियंत्रित करती हैं कि मिश्रण बिल्कुल सटीक बने. अगर सरकार E20 ईंधन तैयार करा रही है कंप्यूटर इस बात को सुनिश्चित करता है कि इस फ्यूल में 20 फीसदी हिस्सा एथेनॉल का होना चाहिए और बाकी बचा हुआ 80 फीसदी हिस्सा शुद्ध पेट्रोल का ही रहे. इसी ऑटोमेटिक सिस्टम की वजह से इस मिश्रण में बिल्कुल भी अंतर देखने को नहीं मिलता है. 

फिर कैसे की जाती है इंजन की सुरक्षा?

अब पेट्रोल में एथेनॉल तो मिला दिया, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह होती है कि यह हवा में मौजूद नमी को बहुत तेजी से अपनी ओर सोखता है. अगर पेट्रोल में पानी मिल जाए तो वह गाड़ी के इंजन को पूरी तरह से खराब कर देगा. इस गंभीर समस्या से बचने के लिए एथेनॉल और पेट्रोल के मिक्चर के साथ खास किस्म के एडिटिव्स मिलाए जाते हैं. ये केमिकल्स जंग को रोकने वाले और इंजन को साफ करने के लिए डिटर्जेंट की तरह से काम करते हैं, जो कि इस पूरे ईंधन को स्थिर रखते हैं, जिससे कि गाड़ी के फ्यूल सिस्टम को कोई नुकसान न हो.

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