Election Results 2026: पांच राज्यों असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव के नतीजे जारी किए जा रहे हैं. सुबह 8 बजे से ही काउंटिंग शुरू हो गई है. मतगणना के अब तक के रुझानों में पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को भी मिल रही है, जिससे मुकाबला बहुत दिलचस्प हो गया है.
चुनावी नतीजों के साथ ही यह सवाल भी सामने आ रहा है कि क्या चुनाव परिणाम घोषित होते ही आचार संहिता खत्म हो जाती है और सत्ता किसके हाथ में आती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या रिजल्ट की घोषणा होते ही आचार संहिता हट जाती है और पावर किसके हाथ में आ जाती है.
कब लागू होती है आचार संहिता?
आचार संहिता चुनाव आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है. यानी जैसे ही चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव की तारीखों का ऐलान करता है, उसी समय से पूरे राज्य में आचार संहिता लागू हो जाती है. आचार संहिता का मकसद चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना होता है ताकि कोई भी पार्टी सत्ता का गलत इस्तेमाल न कर सके.
क्या रिजल्ट आते ही खत्म हो जाती है आचार संहिता?
आमतौर पर लोगों को लगता है कि जैसे ही चुनाव परिणाम घोषित तो होते हैं, आचार संहिता अपने आप खत्म हो जाती है. हालांकि, ऐसा नहीं है, आचार संहिता तभी हटती है जब चुनाव आयोग इसकी औपचारिक घोषणा करता है. यानी नतीजे आने के बाद आयोग के आदेश के जरिए ही आचार संहिता खत्म होती है. ये भी पढ़ें-West Bengal Election Result 2026: किसके पास होती है स्ट्रॉग रूम की चाबी, बंगाल चुनाव खत्म होने के बाद जहां रखी गई थीं ईवीएम?
आचार संहिता के दौरान क्या-क्या होता है बदलाव?
जब तक आचार संहिता लागू रहती है तो सरकार कोई नहीं योजना या घोषणा नहीं कर सकती है. किसी भी तरह के उद्घाटन, शिलान्यास या वित्तीय व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर रोक रहती है. सरकारी विज्ञापनों और प्रचार सामग्री को भी हटाना पड़ता है, ताकि मतदाताओं को प्रभावित न किया जा सके. इसके साथ ही प्रशासनिक मशीनरी पर चुनाव आयोग का नियंत्रण होता है. अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां भी आयोग की निगरानी में होती है, जिससे निष्पक्षता बनी रहे.
चुनाव रिजल्ट आने के बाद किसके हाथ में होती है पावर?
जब चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाती है और आचार संहिता हटती है तब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है. जिस पार्टी या गठबंधन को बहुमत मिलता है उसे सरकार बनाने का मौका दिया जाता है. इसके बाद मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल का गठन होता है और शासन की जिम्मेदारी नई सरकार संभालती है. ऐसे में सारी पावर भी नई सरकार के पास चली जाती है.
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