इस महीने के अंत में धरती को एक अलग चांद नजर आएगा, जिसे नाम दिया गया है मिनी मून. अब आप सोच रहे हैं कि आखिर दूसरा चांद कैसे हो सकता है? तो बता दें कि इसे भले ही मिनी मून नाम दिया गया है, लेकिन ये कोई चांद नहीं बल्कि एक एस्टेरॉयड यानी क्षुद्रग्रह है. जो पृथ्वी की ऑर्बिट में कुछ ही दिनों के लिए रहेगा. जो  29 सितंबर से 25 नवंबर तक धरती की आर्बिट में एक चक्कर लगाएगा. यानी ये पूरे दो महीने धरती से नजर आएगा.

हालांकि आज हम आपको इस मिनी मून के इतर कुछ अलग बताने जा रहे हैं. आपने कभी सोचा है कि चांद कई हो सकते हैं? आपको जानकर हैरानी होगी कि कई ग्रह ऐसे हैं जिनके पास अपने चांद हैं. जी हां, आपको ये जानकर हैरानी जरुर हुई होगी. ऐसे में चलिए आज हम उन ग्रहों के बारे में जानते हैं जिनके पास अपने चांद हैं.

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क्याहोताहैमिनीमून?

वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक छोटे एस्टेरॉइड की पहचान की है, जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में फंस सकता है. यह एस्टेरॉइड 2020 CD3 के नाम से जाना जाता है और यह लगभग 1.9 मीटर चौड़ा है. यदि यह एस्टेरॉइड पृथ्वी के पास से गुजरेगा, तो ये कुछ समय के लिए पृथ्वी का एक अस्थायी चांद बन सकता है. इस खोज ने कई शोधकर्ताओं को एक्साइटेड किया है, क्योंकि यह चांद का अनुभव काफी खास होगा.

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इनग्रहोंकेपासहैंअपनेचांद

सौर मंडल में कई ग्रहों के पास अपने प्राकृतिक उपग्रह हैं, जो उन्हें खास बनाते हैं.

बृहस्पति- जुपिटर हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसके पास 79 ज्ञात चांद हैं. इनमें से गनिमेड सबसे बड़ा चांद है, जो बुध से भी बड़ा है. गनिमेड में एक खास वातावरण है, जहां जीवन संभव है.

शनि- शनि ग्रह के पास सबसे ज्यादा चांद हैं. वैज्ञानिकों ने अब तक शनि के 82 चांद खोज निकाले हैं.

यूरेनस-यूरेनस ग्रह के पास 27 चांद हैं.

नेप्च्यून-नेप्च्यून ग्रह के पास 14 चांद हैं.

मंगल-मंगल ग्रह के पास केवल दो छोटे चांद हैं, जिनके नाम फोबोस और डिमोस हैं.

चांदकैसेबनतेहैं?

चांदों के बनने के कई तरीके हैं. कुछ चांद ग्रहों के गठन के समय बचे हुए मलबे से बनते हैं, जबकि कुछ अन्य ग्रहों से टकराने वाले उल्कापिंडों से बनते हैं. कुछ चांद ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण बल में फंसे हुए छोटे पिंड भी हो सकते हैं.

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