Trump Tariffs: ईरान के साथ बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत टैरिफ के रूप में जमा किए गए अरबों डॉलर को वापस करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन शुल्कों को गैरकानूनी घोषित कर दिया है. 166 अरब डॉलर की भारी भरकम राशि वापस की जानी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या भारत को इस रिफंड से कोई फायदा होगा.
अमेरिका टैरिफ क्यों वापस कर रहा है?
यह टैरिफ मूल रूप से भारत सहित कई देशों पर एक साथ लगाए गए थे. हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है कि ये शुल्क कानूनी मानकों के अनुरूप नहीं थे. यही वजह है कि अमेरिकी सरकार ने बड़े पैमाने पर रिफंड प्रक्रिया को शुरू कर दिया है.
भारत से कितनी राशि जुड़ी है?
इन टैरिफ से भारत काफी हद तक प्रभावित हुआ था. लगभग 48 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट पर 2025 के बीच से काफी ज्यादा शुल्क लगाए गए थे. कुल रिफंड राशि में लगभग 12 अरब डॉलर भारतीय सामानों से जुड़े हैं. इससे भारत इस रिफंड प्रक्रिया में बड़े हितधारकों में से एक बन गया है.
किसे मिलेगा रिफंड?
दरअसल भारत को यह पैसा सीधे तौर पर नहीं मिलेगा. अमेरिकी व्यापार नियमों के तहत रिफंड सिर्फ आयातक को ही जारी किए जाते हैं. ये वे अमेरिकी कंपनियां है जिन्होंने अमेरिका में सामान आयात करते समय टैरिफ का भुगतान किया था. इस वजह से तकनीकी रूप से यह पैसा अमेरिकी आयातकों के पास वापस जाता है ना कि भारतीय निर्यातकों या भारत सरकार के पास.
भारतीय कंपनियों को कैसे होगा फायदा?
भले ही है पैसा सीधे भारत ना आए लेकिन इसके इनडायरेक्ट फायदे जरूर होंगे. भारतीय निर्यातक अपने अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत करके रिफंड में अपना हिस्सा मांग सकते हैं. खासकर तब जब अनुबंधों में टैरिफ समायोजन से संबंधित शर्तें शामिल हों. इसके अलावा टैरिफ हटाए जाने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटेटिव हो जाएंगे.
रिफंड कब प्रोसेस होगा
यूएस कस्टम्स द्वारा बनाए गए एक खास ऑनलाइन सिस्टम के जरिए रिफंड की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. दावे मंजूर होने के बाद पेमेंट 60 से 90 दिनों के अंदर प्रोसेस होने की उम्मीद की जा रही है.
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