Heartbreak Pain: दिल टूटने को आमतौर पर एक भावनात्मक अनुभव के बारे में बताया जाता है. लेकिन जो कोई भी इस भावनात्मक संकट से गुजरा है वह जानता है कि यह कभी-कभी शारीरिक रूप से दर्दनाक भी महसूस हो सकता है. ब्रेकअप, किसी प्रियजन को खोना या फिर अचानक भावनात्मक झटका लगने से शरीर में काफी ज्यादा परिवर्तन हो सकते हैं. इनमें सीने में तकलीफ, पेट की समस्या, दिल की धड़कन का तेज होना और मांसपेशियों में तनाव शामिल है. 

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लेकिन क्या टूटा हुआ दिल वास्तव में शरीर में दर्द पैदा करने में सक्षम है? विज्ञान के मुताबिक इसका उत्तर हां है. भावनात्मक दर्द सिर्फ एक काल्पनिक अनुभूति नहीं है. जब भी कोई व्यक्ति गंभीर तनाव का अनुभव करता है तो उसके दिमाग और शरीर के अंदर असली शारीरिक प्रतिक्रिया होती है.

मस्तिष्क भावनात्मक और शारीरिक दर्द को संसाधित कर सकता है 

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दिल टूटने पर शारीरिक रूप से दर्दनाक महसूस होने की एक वजह यह है कि दिमाग भावनात्मक संकट को किस तरह से संसाधित करता है. दिमाग इमेजिंग स्टडी से पता चला है कि काफी ज्यादा भावनात्मक दर्द शारीरिक दर्द में शामिल कुछ सामान क्षेत्र को सक्रिय कर सकता है. 

पूर्वकाल इंसुला और पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स जैसे क्षेत्र शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के दर्द को संसाधित करने में शामिल होते हैं. यह क्षेत्र तप सक्रिय हो सकते हैं जब कोई व्यक्ति तीव्र अस्वीकृति, नुकसान या फिर भावनात्मक संकट को महसूस करता है. 

यह संबंध इस बात को समझने में मदद करता है कि क्यों दिल टूटने से गुजरने वाला कोई व्यक्ति उस अनुभव को सिर्फ दुखी महसूस करने के‌ बजाय शारीरिक दर्द के रूप में बता सकता है. भावनात्मक अनुभव पूरे शरीर में एक जैविक प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकता है. 

दिल टूटने के दौरान तनाव हार्मोन बढ़ जाते हैं 

एक बड़ा भावनात्मक झटका शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देता है. जब कोई रिश्ता खत्म हो जाता है या फिर किसी को जरूरी व्यक्तिगत हानि का अनुभव होता है तो आनंद, लगाव और भावनात्मक भलाई से जुड़े मस्तिक रसायनों में बदलाव हो सकते हैं.

किसी के साथ शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव हार्मोन की बढ़ी हुई मात्रा जारी कर सकता है. यह हार्मोन शरीर को तनावपूर्ण स्थिति पर प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार करते हैं. 

जैसे-जैसे एड्रेनालाईन का स्तर बढ़ता है दिल तेजी से धड़क सकता है, मांसपेशियां तनावग्रस्त हो सकती है और सांस लेने का पैटर्न बदल सकता है. यह शारीरिक प्रतिक्रियाएं छाती में दबाव, भारीपन या फिर असुविधा की भावनाओं में योगदान दे सकती हैं.

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम क्या है? 

काफी ज्यादा भावनात्मक तनाव के शारीरिक प्रभाव कभी-कभी अस्थायी परेशानी से भी आगे बढ़ सकते हैं. चिकित्सा विज्ञान एक ऐसी स्थिति को पहचानता है जिसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, या फिर ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी के रूप में जाना जाता है.

इस स्थिति में गंभीर भावनात्मक या फिर शारीरिक तनाव अस्थायी रूप से दिल के बाएं वेंट्रिकल को कमजोर कर सकता है. इससे सामान्य रूप से खून पंप करने की क्षमता कम हो जाती है. लक्षण दिल के दौरे के समान हो सकते हैं और इसमें सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल हो सकती है. 

स्थिति आमतौर पर अस्थायी होती है और जैसे ही दिल सामान्य काम पर लौटता है कई लोग ठीक हो जाते हैं. हालांकि सीने में दर्द या फिर सांस लेने में मुश्किल को कभी भी भावनात्मक तनाव के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि इसी तरह के लक्षण दिल के दौरे या फिर दूसरी गंभीर चिकित्सा स्थितियों के दौरान भी हो सकते हैं. 

दिल टूटने का असर पेट पर क्यों पड़ता है? 

दिल टूटने का पाचन तंत्र पर भी काफी ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिमाग और पाचन तंत्र काफी ज्यादा जुड़े हुए हैं और तनाव हार्मोन सामान्य पाचन गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं. 

काफी ज्यादा भावनात्मक संकट के समय के दौरान कुछ लोगों को भूख में कमी, मतली या पेट में परेशानी का अनुभव हो सकता है. दूसरों को ऐंठन या फिर उनके सामान्य पाचन पैटर्न में बदलाव का अनुभव हो सकता है. यह लक्षण इस बात का उदाहरण देते हैं कि भावनात्मक अनुभव कैसे शारीरिक प्रभाव पैदा कर सकते हैं.

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