क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप किसी पार्क या खाली मैदान में टहल रहे होते हैं, तो आपका शरीर किस दिशा में ज्यादा झुकता है. विज्ञान की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इंसानों के चलने के तौर-तरीकों पर एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हम बिना किसी तय रास्ते के वॉक करते हैं, तो जाने-अनजाने में दाईं तरफ के मुकाबले बाईं तरफ यानी घड़ी की सुइयों के उल्टी दिशा में ज्यादा मुड़ते हैं. हमारे चलने का यह खास अंदाज किसी बाहरी वजह से नहीं, बल्कि हमारे शरीर के अंदरूनी विज्ञान से जुड़ा हुआ है.

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महामारी के दौरान हुई रिसर्च की शुरुआत

इस दिलचस्प खोज की कहानी कोरोना महामारी के दौर से जुड़ी हुई है. उस समय वैज्ञानिक सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी के नियमों को समझने के लिए इंसानी आवाजाही पर नजर रख रहे थे. शुरुआत में रिसर्चर्स को लगता था कि इंसान चलते समय बिल्कुल रैंडम तरीके से किसी भी दिशा में मुड़ जाता है. लेकिन जब उन्होंने इस पर गहराई से डेटा जुटाया, तो नतीजे पूरी तरह चौंकाने वाले निकले. इंसानों के मुड़ने का यह तरीका किसी संयोग के तहत नहीं, बल्कि एक खास ग्लोबल पैटर्न के हिसाब से काम कर रहा था.

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स्पेन और जापान में हुए अनोखे प्रयोग

इंसान की इस छिपी हुई आदत को परखने के लिए वैज्ञानिकों ने स्पेन और जापान जैसे अलग-अलग देशों में कई बड़े प्रयोग किए. इन टेस्ट में अलग-अलग संस्कृतियों और उम्र के लोगों के चलने के स्टाइल को रिकॉर्ड किया गया. भीड़ के असर से बचने के लिए वैज्ञानिकों ने लोगों को बिल्कुल अकेले चलाकर भी देखा. एक मुख्य प्रयोग में 209 लोगों को कुर्सियों और मेजों से बने एक छह कोने वाले बंद कमरे में अकेले घूमने को कहा गया. वहां बिना किसी दबाव के भी ज्यादातर लोगों ने बाईं तरफ ही टर्न लिया.

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दाएं या बाएं हाथ से कोई संबंध नहीं

इस खुलासे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बाएं हाथ से काम करने वाले यानी लेफ्ट हैंडेड लोग भी ऐसा ही करते हैं. वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इंसान के दाएं या बाएं हाथ के इस्तेमाल से इस आदत का कोई लेना-देना नहीं है. इसी तरह आपका कौन सा पैर ज्यादा मजबूत है या आपका जेंडर क्या है, इस बात का भी बाईं तरफ मुड़ने के पैटर्न पर कोई असर नहीं पड़ता है. यह आदत हर इंसान में एक समान रूप से काम करती है.

उम्र का दिखता है थोड़ा सा असर

इस पूरी रिसर्च के दौरान अगर किसी एक चीज का थोड़ा बहुत असर देखने को मिला, तो वह थी इंसान की उम्र. वैज्ञानिकों ने पाया कि कम उम्र के युवाओं में बाईं तरफ मुड़ने की यह प्राकृतिक आदत बहुत ज्यादा मजबूत और साफ दिखाई देती है. हालांकि इस शुरुआती स्टडी में 35 साल से अधिक उम्र के लोगों को शामिल नहीं किया गया था. इसी वजह से वैज्ञानिक अब बड़ी उम्र के लोगों पर भी इसके प्रभाव को देखने के लिए आगे की जांच करने की तैयारी कर रहे हैं.

खारिज हो गईं मैग्नेटिक फील्ड से जुड़ी पुरानी थ्योरीज

चलते समय बाईं तरफ मुड़ने की इस आदत के पीछे की असली वजह क्या है, इसे लेकर पहले कई तरह के दावे किए जाते थे. कुछ जानकारों का मानना था कि धरती की कोरिओलिस फोर्स या चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फील्ड) के कारण इंसान ऐसा करता है. लेकिन नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन सभी पुरानी थ्योरीज को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. इन ताकतों का इंसानी चाल से कोई संबंध नहीं मिला है, फिर भी लोगों का बाईं तरफ मुड़ने का व्यवहार जस का तस बना रहा.

शरीर के भीतर छिपा है असली कारण

सभी बाहरी वजहों के खारिज होने के बाद अब वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह पूरी तरह से एक बायोलॉजिकल यानी जैविक मामला है. साइंटिस्ट्स का मानना है कि यह हमारे शरीर के बायोमैकेनिकल लेवल पर मौजूद किसी छोटे से असंतुलन या बनावट की असमानता की वजह से होता है. हमारे शरीर का अंदरूनी ढांचा और दिमाग का संतुलन हमें बिना सोचे-समझे बाईं तरफ मुड़ने के लिए प्रेरित करता है, जो हमें प्रकृति से मिला एक अनूठा इंसानी व्यवहार है.

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