India Pakistan Companies: 1947 से पहले जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन नहीं हुआ था तब भारत में कई जानी-मानी कंपनियां स्थापित हुई थीं. बाद में जब बंटवारा हो गया तब यह कंपनियां बंट गई. ऐसी ही कुछ कंपनियां अभी भी पाकिस्तान के लिए पैसा कमा रही हैं. आइए जानते हैं कौन सी हैं यह कंपनियां.
बिजनेस पर बंटवारे का असर
1947 में भारत के बंटवारे में सिर्फ जमीन और लोगों को ही नहीं बांटा बल्कि इसने उद्योग, बैंक और कमर्शियल उद्योगों को भी बांट दिया. काम करने वाले बिजनेस को या तो किसी एक पक्ष को चुनना पड़ा या अपने ऑपरेशंस को बांटना पड़ा. इसका नतीजा यह निकला कि मुंबई, दिल्ली और लाहौर जैसे शहरों में शुरू हुई कई कंपनियों ने अलग-अलग स्वामित्व और कानूनी ढांचे के तहत भारत और पाकिस्तान में स्वतंत्र रूप से अपनी यात्रा को जारी रखा.
हमदर्द लैबोरेटरीज
हमदर्द लैबोरेटरीज की स्थापना 1906 में दिल्ली में हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने एक यूनानी दवा क्लीनिक के रूप में की थी. बंटवारे के बाद उनके छोटे बेटे हकीम मोहम्मद सईद 1948 में कराची चले गए और हमदर्द पाकिस्तान की स्थापना की.
आज हमदर्द इंडिया और हमदर्द पाकिस्तान पूरी तरह से स्वतंत्र चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में काम करते हैं. कंपनी का मशहूर प्रोडक्ट रूह अफजा दोनों देशों में अलग-अलग बनाया जाता है. दोनों में से कोई भी इकाई एक दूसरे के लिए पैसे नहीं कमाती और दोनों अपने-अपने देश में स्वास्थ्य सेवा शिक्षा और सामाजिक कल्याण में मुनाफे का फिर से निवेश करते हैं.
हबीब बैंक लिमिटेड
हबीब बैंक लिमिटेड की स्थापना 1941 में मुंबई में हबीब परिवार ने मोहम्मद अली जिन्ना की गुजारिश पर की थी. पाकिस्तान बनने के बाद बैंक ने अपना मुख्यालय कराची में शिफ्ट कर दिया और पाकिस्तान का पहला कमर्शियल बैंक बन गया. 1974 में राष्ट्रीयकरण के बाद हबीब बैंक लिमिटेड अब पाकिस्तान का सबसे बड़ा बैंक है. यह बैंक 25 से ज्यादा देशों में काम करता है. जरूरी बात यह है कि आज जिसका भारत से कोई ऑपरेशनल या फिर वित्तीय संबंध नहीं है.
एलाइड बैंक
इस बैंक की शुरुआत 1942 में लाहौर में ऑस्ट्रेलेशिया बैंक के रूप में हुई थी. बंटवारे के बाद कई भारतीय बैंक पाकिस्तान से बाहर चले गए, जिससे एलाइड बैंक को तेजी से बढ़ने का मौका मिला. बैंक का 1974 में राष्ट्रीयकरण किया गया और बाद में इसका निजीकरण कर दिया गया.
डालडा
डालडा ब्रांड 1937 में ब्रिटिश भारत में हिंदुस्तान वनस्पति मैन्युफैक्चरिंग कंपनी द्वारा पेश किया गया था. बंटवारे के बाद डालडा पाकिस्तान में भी काफी मशहूर हो गया. 2000 के दशक की शुरुआत में युनिलीवर ने दोनों देशों में डालडा ब्रांड को अलग-अलग बीच दिया. भारत में इसे बंज लिमिटेड ने खरीदा और पाकिस्तान में यह वेस्टबरी ग्रुप के पास चला गया. वेस्टबरी ग्रुप ने इसका नाम बदलकर डालडा फूड्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया.
क्या यह कंपनियां आज पाकिस्तान के लिए पैसा कमाती हैं
दरअसल यह कंपनियां भारत की तरफ से पाकिस्तान के लिए पैसा नहीं कमाती हैं. क्योंकि बंटवारे के बाद अब वह कंपनी पाकिस्तान में ही स्थापित हो चुकी हैं तो हर तरह की वित्तीय गतिविधि सख्ती से इस देश की कानूनी और आर्थिक प्रणाली के भीतर हो रही है.
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