Space Storms: सभी को ऐसा लगता है कि सिर्फ पृथ्वी पर ही तूफान आता है. लेकिन ऐसा नहीं है. आपको बता दें कि अंतरिक्ष में भी तूफान आते हैं. इन्हें स्पेस स्टॉर्म या फिर सोलर स्टॉर्म के नाम से जाना जाता है. भले ही यह सुनने में काफी अजीब लगे लेकिन यह धरती के तूफानों से काफी अलग होते हैं. 

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क्या होता है स्पेस स्टॉर्म 

स्पेस स्टॉर्म सूरज से निकलते हैं और तेज सौर गतिविधि से चलते हैं. पृथ्वी के तूफानों के उलट इनमें हवा, बादल या फिर पानी शामिल नहीं होता. इसके बजाय यह हाई एनर्जी प्लाज्मा, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन जैसे चार्ज्ड कणों और सौर विस्फोटों के दौरान निकलने वाली शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र से बने होते हैं.

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कैसे बनते हैं यह तूफान 

पृथ्वी पर तूफान वायुमंडलीय दबाव, तापमान और नमी में बदलाव की वजह से बनते हैं. बारिश, बर्फ, चक्रवात और तेज हवाएं सभी हवा और पानी के वायुमंडल में मिलने से बनते हैं. हालांकि स्पेस स्टॉर्म वैक्यूम में होते हैं जहां पर हवा या पानी नहीं होता. यह पूरी तरह से अलग होते हैं. इनमें बिजली से चार्ज कण और चुंबकीय ऊर्जा काफी तेज गति से अंतरिक्ष में दौड़ते हैं.

यह तूफान कहां से आते हैं 

पृथ्वी के तूफान पृथ्वी के अपने वायुमंडल में विकसित होते हैं. दूसरी तरफ सोलर स्टॉर्म सीधे सूरज पर बड़े विस्फोट से निकलते हैं. सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इंजेक्शन जैसी घटनाएं ऊर्जा और पदार्थ के बड़े विस्फोट छोड़ती हैं जो सौर मंडल में यात्रा करते हैं. आपको बता दें कि सोलर फ्लेयर्स प्रकाश की गति से चलते हैं. यह 8 मिनट में पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं. 

पृथ्वी और टेक्नोलॉजी पर असर 

पृथ्वी पर तूफान बाढ़ ला सकते हैं, पेड़ उखाड़ सकते हैं, इमारत को नुकसान पहुंचा सकते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी को बाधित कर सकते हैं. स्पेस स्टॉर्म जमीन पर लोगों को शारीरिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचते हैं, लेकिन वह आधुनिक टेक्नोलॉजी के लिए काफी गंभीर खतरा पैदा करते हैं. 

तेज सोलर स्टॉर्म रेडियो ब्लैकआउट कर सकते हैं. ये सैटेलाइट को नुकसान पहुंचा सकते हैं और साथ ही जीपीएस नेविगेशन को बाधित कर सकते हैं. इतना ही नहीं बल्कि यह एविएशन सिस्टम में हस्तक्षेप कर सकते हैं और यहां तक की बड़े पैमाने पर पावर ग्रिड फैलियर भी कर सकते हैं.

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