यूपी कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अपनी भावी योजनाओं को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह राजनीति में प्रवेश करेंगी, लेकिन किसी स्थापित राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय आम जनता के सहयोग से एक नया मंच तैयार करेंगी. दिव्या मित्तल ने 13 वर्षों की सफल प्रशासनिक सेवा के बाद 30 अगस्त 2026 को अपने पद से त्यागपत्र दिया था, जिसे 15 सितंबर को औपचारिक मंजूरी मिली. प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक जीवन चुनने के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नेता बनने के बाद भी उन्हें पूर्व आईएएस अधिकारी के रूप में सरकारी पेंशन का लाभ मिलता रहेगा या नहीं. आइए जानते हैं क्या कहते हैं इससे जुड़े नियम.

Continues below advertisement

आईएएस दिव्या मित्तल का नया राजनीतिक सफर

उत्तर प्रदेश कैडर की तेजतर्रार अधिकारी के रूप में पहचानी जाने वाली दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक दायित्वों से अलग होने के बाद अपने अगले पड़ाव की घोषणा कर दी है. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका इरादा किसी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का बिल्कुल नहीं है. इसके बजाय वह एक ऐसा स्वतंत्र मंच स्थापित करना चाहती हैं जो सीधे तौर पर आम नागरिकों की जमीनी समस्याओं और मुद्दों पर केंद्रित हो. करीब 13 वर्षों की सरकारी नौकरी के बाद लिए गए इस फैसले के पीछे उन्होंने पारिवारिक तथा व्यक्तिगत वजहों का हवाला दिया था.

Continues below advertisement

बीच में इस्तीफा देने के बाद क्या मिलती रहेगी पेंशन?

कानूनी और प्रशासनिक नियमों के अनुसार, जब कोई आईएएस अधिकारी अपनी इच्छा से इस्तीफा देता है, तो उसे पुरानी सेवा के आधार पर पेंशन पाने का हक नहीं रहता है. अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 5(1) में स्पष्ट प्रावधान है कि त्यागपत्र देने की स्थिति में अधिकारी की पुरानी सेवा की गणना शून्य मान ली जाती है. इसका सीधा अर्थ यह है कि नौकरी से त्यागपत्र देते ही सेवा की निरंतरता समाप्त हो जाती है और पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ पाने का अधिकार पूरी तरह खत्म हो जाता है.

यह भी पढ़ें: IAS छोड़ कितने लोग बन चुके नेता, जानें किसे कितनी मिली कामयाबी?

वीआरएस और इस्तीफे में अंतर का नियम

प्रशासनिक सेवा में इस्तीफा देने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने की प्रक्रिया में बड़ा वैधानिक अंतर होता है. वीआरएस के तहत सेवानिवृत्ति पाने के लिए किसी भी आईएएस अधिकारी को कम से कम 20 साल की नियमित और अर्हकारी सेवा पूरी करनी अनिवार्य होती है. 20 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वीआरएस लेने वाले अफसरों को नियमानुसार पेंशन की पात्रता मिलती है. चूंकि दिव्या मित्तल ने सिर्फ 13 वर्ष की सेवा के बाद पद से इस्तीफा दिया है, इसलिए वे वीआरएस के नियमों के तहत पेंशन पाने के दायरे में नहीं आती हैं.

एनपीएस और यूपीएस फंड का पूरा गणित

जो सरकारी अधिकारी या आईएएस अफसर 1 जनवरी 2004 के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए हैं, वे पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर अंशदायी पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस के तहत आते हैं. इस व्यवस्था में सरकारी पेंशन सीधे तौर पर नहीं मिलती, बल्कि अधिकारी के पूरे सेवाकाल के दौरान जमा हुआ फंड मायने रखता है. यदि कोई अधिकारी बीच में ही सेवा से त्यागपत्र देता है, तो सरकारी अंशदान का लाभ रुक जाता है, हालांकि अधिकारी अपने खुद के जमा किए गए एनपीएस फंड और उस पर मिले रिटर्न को निर्धारित नियमों के तहत निकाल सकता है.

सेवानिवृत्ति पर आईएएस पेंशन तय करने का फॉर्मूला

आईएएस अधिकारियों को दी जाने वाली पेंशन की राशि का निर्धारण उनके सेवाकाल की अंतिम बेसिक सैलरी के आधार पर किया जाता है. सातवें वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सेवानिवृत्ति के समय अधिकारी को मिलने वाले मूल वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा हर महीने पेंशन के रूप में स्वीकृत किया जाता है. इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित किया जाने वाला महंगाई भत्ता (डीए) भी इस मूल पेंशन राशि में जोड़ा जाता है, जिससे पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके.

शीर्ष पदों से रिटायरमेंट पर मिलने वाली पेंशन

देश के सबसे वरिष्ठ आईएएस पद यानी कैबिनेट सेक्रेटरी के पद से रिटायर होने वाले अधिकारियों को सबसे अधिक पेंशन मिलती है. कैबिनेट सेक्रेटरी की अंतिम बेसिक सैलरी लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति माह निर्धारित है. इस हिसाब से रिटायरमेंट के बाद उन्हें हर महीने करीब 1.25 लाख रुपये की पेंशन प्राप्त होती है, जिसमें महंगाई भत्ता अलग से जुड़ता है. लेकिन चूंकि दिव्या मित्तल ने 20 साल की आवश्यक सेवा अवधि पूरी होने से पहले इस्तीफा दिया है, इसलिए उन्हें इस पेंशन योजना का कोई लाभ नहीं मिल सकेगा.

यह भी पढ़ें: भारत में 2.67% तो अमेरिका में 1.27% सोना सस्ता, दोनों देशों में अंतर क्यों?