नासा एक बार फिर इंसानों को चांद तक पहुंचाने की तैयारी में जुटा है. इस मिशन सीरीज को Artemis मिशन कहा जाता है, जिसे तीन बड़े स्टेज Artemis I, Artemis II और Artemis III में पूरा किया जाना है. वहीं नासा के इन तीनों ही मिशनों का मकसद अलग है और सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि Artemis I, II और III में क्या फर्क है. 

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Artemis I बिना इंसानों के पहला टेस्ट मिशन 

Artemis I इस पूरी सीरीज की शुरुआत था. यह अनक्रूड मिशन था, यानी इसमें कोई इंसान शामिल नहीं था. इस मिशन में नासा ने अपने नए स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और Orion स्पेसक्राफ्ट को पहली बार चांद की कक्षा तक भेज कर टेस्ट किया.  इस दौरान Orion कैप्सूल करीब 25 दिन की यात्रा पर रहा और चांद का चक्कर लगाने के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरा था.  इस मिशन का मकसद रॉकेट, स्पेसक्राफ्ट, नेविगेशन सिस्टम और री-एंट्री जैसी अहम तकनीक की जांच करना था, ताकि आगे इंसानों को भेजने से पहले सभी खतरों को समझा जा सके. 

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Artemis II  इंसानों के साथ चांद की पहली उड़ान 

Artemis II नासा का पहला क्रूड मिशन होने वाला है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री Orion स्पेसक्राफ्ट में बैठकर चांद की ओर रवाना होंगे. यह मिशन चांद पर लैंड नहीं करेगा, बल्कि चांद के चारों ओर फ्लाइबाय करेगा और फिर पृथ्वी पर लौट आएगा. इस मिशन का समय करीब 10 दिन का होगा. इसमें अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, रेडिएशन से बचाव, नेविगेशन और इमरजेंसी सिस्टम की असली परीक्षा होगी. वहीं Artemis II की सबसे खास सेफ्टी तकनीक इसका फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी रास्ता है. अगर किसी वजह से मुख्य इंजन फेल हो जाए, तो भी मिशन खतरे में नहीं पड़ेगा. वहीं चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति Orion  कैप्सूल को अपने आप ऐसे मोड़ देगी कि वह बिना एक्स्ट्रा ईंधन के पृथ्वी की ओर लौट आए. यह तरीका अपोलो मिशन में भी इस्तेमाल किया गया था और इसे बहुत भरोसेमंद माना जाता है..

आर्टेमिस III में 50 साल बाद इंसान चांद पर इंसानों की होगी वापसी 

Artemis III सबसे अहम और ऐतिहासिक मिशन माना जा रहा है.  इसके तहत 1972 के बाद पहली बार इंसान चांद की सतह पर उतरेंगे.  यह मिशन चांद के साउथ पोल क्षेत्र में लैंडिंग करेगा, जहां अब तक कोई इंसान नहीं पहुंचा है.  इस मिशन में Orion स्पेसक्राफ्ट यात्रियों को चांद की कक्षा तक ले जाएगा. आर्टेमिस III मिशन 2027 में निर्धारित है.

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