Parashurama Story: सबने बचपन से ही प्राचीन कहानियों में रामायण-महाभारत सुनी होगी,. इसके अलावा एक कहानी और है, जिसको याद किया जाता है. वह है परशुराम जी की 21 बार समस्त क्षत्रियों का संहार करने की कहानी. माना जाता है कि उन्होंने 21 बार क्षत्रियों के वंश खत्म करके धरती को क्षत्रिय विहीन बनाया था. ऐसे में कई लोगों के दिमाग में एक सवाल आता है कि क्या रामायण और महाभारत की तरह इसका भी हिंदू ग्रंथों में कहीं जिक्र है? आइए इसके बारे में जानते हैं हर बात.
कौन थे भगवान परशुराम?
भगवान परशुराम को आखिर कौन नहीं जनता होगा. भगवान परशुराम का नाम सुनते ही मन में एक ऐसे योद्धा की छवि आती है, जो एक हाथ में फरसा लिए धरती पर न्याय कायम करने निकला हो. परशुराम को जगत के पालनहार श्री विष्णु भगवान का छठा रूप माना जाता है. वह अत्यंत शक्तिशाली और बुद्धिमान योद्धा थे. परशुराम द्वारा 21 बार क्षत्रियों के संहार की कथा का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में किया गया है.
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पुराणों और महाभारत में मिलता है इस कथा का उल्लेख
इस पूरी कहानी की बात करें तो इसकी शुरुआत राजा सहस्त्रार्जुन से होती है. माना जाता है कि ये महाराज भगवान दत्तात्रेय के वरदान से बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली राजा बन जाते हैं. अपनी शक्ति के कारण उन्हें घमंड हो जाता है. इसी बीच राजा ऋषि जमदग्नि के आश्रम में पहुंचता है और वहां ऋषि के पास मौजूद कामधेनु नाम की दिव्य गाय की मांग करता है. ऋषि द्वारा प्रस्ताव ठुकराने के बाद राजा अत्यधिक गुस्से में आ जाता है और पूरे आश्रम में तोड़फोड़ कर देता है. इस घटना के बाद जब परशुराम को ये सारी बातें पता चलती हैं तो वे राजा सहस्त्रार्जुन का वध कर देते हैं. इसके बाद परशुराम के पिता उन्हें तीर्थ यात्रा पर भेज देते हैं, जिसका फायदा सहस्त्रार्जुन के पुत्र उठा लेते हैं और ऋषि जमदग्नि की हत्या कर देते हैं.
पिता की इस हत्या के बाद परशुराम ने धरती पर 21 बार क्षत्रियों का संहार किया. एक मान्यता यह भी है कि सहस्त्रार्जुन के सैनिकों ने जमदग्नि के शरीर पर 21 वार किए थे, इसलिए परशुराम ने हर एक वार का बदला 21 बार क्षत्रियों का संहार करके लिया.
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