Dharmendra Pradhan Resignation: NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP और युवाओं के प्रोटेस्ट के बीच अब देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया है. इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद हर तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है. मंत्रियों के इस्तीफे की खबर जब भी आती है.

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तो देश के राजनीतिक इतिहास के वह पन्ने खुल जाते हैं जहां से इस तरह मंत्रियों के पद छोड़ने की शुरुआत हुई थी. आज भले ही राजनीतिक वजहों से इस्तीफे दिए जा रहे हों लेकिन क्या आपको पता है आजाद भारत में सबसे पहले इस्तीफे के पीछे क्या था कारण और किस नेता ने दिया था. चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी. 

आजाद भारत का पहला कैबिनेट इस्तीफा 

देश की आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बनाया गया था. वह आधुनिक भारत के इतिहास में केंद्रीय कैबिनेट पद से इस्तीफा देने वाले सबसे पहले मंत्री बने. 6 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. 

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इस वजह से दिया था इस्तीफा

उनके इस्तीफे की वजह उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ नेहरू-लियाकत समझौता था. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासतौर पर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार की नीति से बिल्कुल असहमत थे. जब उनकी बात नहीं मानी गई तो उन्होंने बिना देर किए कैबिनेट छोड़ दी. 

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बाद में बनाई नई पार्टी

नेहरू सरकार से अलग होने के बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से भारतीय जनसंघ की स्थापना की जो कि बाद में चलकर  भारतीय जनता पार्टी बनीं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष दर्जे अनुच्छेद 370 और एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान के खिलाफ खुलकर आंदोलन चलाया था. 

इन दिग्गजों ने भी छोड़ी थी केबिनेट

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस्तीफा देने के बाद ही डॉ. बी.आर. अंबेडकर जो उस समय कानून और न्याय मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जो उस समय रेल और परिवहन मंत्री थे. इन दोनों  दिग्गज नेताओं ने भी अलग-अलग मुद्दों पर कैबिनेट से अपने इस्तीफे सौंपे दिए थे.

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