दिल्ली युनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित सत्य निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत के अचानक गिर जाने से हड़कंप मच गया. बताया जा रहा है कि इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत भी हो गई है. वहीं कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका भी बता जा रही है. दरअसल, यह इमारत छात्रों के रहने के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी. हादसे की वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है. यह घटनास्थल दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के बेहद करीब है और आसपास बड़ी संख्या में छात्र PG, हॉस्टल और किराये के मकानों में रहते हैं. ऐसे में आइए जानते है कि दिल्ली युनिवर्सिटी का इतिहास क्या है और इसे किसने बनवाया था.

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1922 में हुई थी स्थापना

दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना 1922 में दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत हुई थी. यह कानून तत्कालीन केंद्रीय विधान सभा ने पारित किया था. विश्वविद्यालय का गठन 1 मई 1922 को हुआ. यानी दिल्ली युनिवर्सिटी करीब 104 वर्ष पुरानी हो चुकी है. इसे तत्कालीन ब्रिटिश भारत की केंद्रीय विधायी व्यवस्था के जरिए स्थापित किया गया था. यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इसे उस समय एक यूनिटरी, टीचिंग और रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटी के रूप में स्थापित किय गया था.

कैस बनी दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली यूनिवर्सिटी बिल 16 जनवरी 1922 को पेश किया गया. इसे 22 फरवरी को केंद्रीय विधान सभा और 28 फरवरी को काउंसिल ऑफ स्टेट्स ने पारित किया. तत्कालीन वायसराय ने 5 मार्च को इसकी मंजूरी दी और 1 मई को एक्ट लागू हो गया. विश्वविद्यालय के पहले चांसलर तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रीडिंग बने थे, जबकि सर हरि सिंह गौर को पहला वाइस चांसलर नियुक्त किया गया थ. मुहम्मद शफी पहले प्रो-चांसलर और जी.एम.डी. सूफी पहले रजिस्ट्रार थे.

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सिर्फ तीन कॉलेजों से हुई थी शुरुआत

आज दिल्ली यूनिवर्सिट से जुड़े कॉलेजों और विभागों का विशाल नेटवर्क देखकर शायद यकीन करना मुश्किल हो कि इसकी शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी. विश्वविद्यालय की स्थापना के समय इसके साथ सेंट स्टीफंस कॉलेज, हिंदू कॉलेज और रामजस कॉलेज जुड़े थे. ये तीनों कॉलेज विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले ही अस्तित्व में आ चुके थे. शुरुआत में विश्वविद्यालय के पास केवल दो फैकल्टी आर्ट्स और साइंस थीं. इसके तहत अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, संस्कृत, अरबी, फारसी, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे आठ विभाग थे. यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी की शुरुआत भी महज 1,380 पुस्तकों के संग्रह से हुई थी. एक सदी से ज्यादा के सफर में DU ने खुद को देश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थापित किया है. यूनिवर्सिटी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आज यह देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में शामिल है और इसकी अकादमिक विरासत का विस्तार देश-विदेश तक है.

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