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इमारत गिरने से पहले कौन-कौन से संकेत देती है, दरारें कब बन जाती हैं खतरनाक

सत्य निकेतन हादसे से सबक लेते हुए इमारतों में सीलन, जाम होते दरवाजे, 5 मिमी से चौड़ी या तिरछी दरारों और बीम-कॉलम की टूट-फूट जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें. यह हादसे की वजह बन सकते हैं.

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  • पांच मिमी से चौड़ी, तिरछी दरारें, जंग इमारत ढहाती है।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बनी पांच मंजिला इमारत जब भरभराकर गिरी, तो उसमें कई बेकसूर छात्रों के सपने और जिंदगी मलबे के ढेर में दफन हो गए. पीजी में रहकर अपने सुनहरे भविष्य की उम्मीद सजा रहे ये युवा जिन दीवारों के भरोसे रह रहे थे, वे लंबे समय से सीलन और गंभीर दरारों के रूप में मौत का इशारा दे रही थीं. लगभग एक सप्ताह से चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान भी इस खतरे को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया. लापरवाही के इस भयावह आलम ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि इमारत गिरने से पहले कौन-कौन से संकेत देती है और ये दरारें कब खतरनाक बन जाती हैं.

बिल्डिंग गिरने से पहले मिलने वाले प्रमुख खतरे

किसी भी रिहायशी या व्यावसायिक ढांचे का अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह जाना महज एक पल का हादसा नहीं होता है. इसके पीछे महीनों और सालों से नजरअंदाज की जा रही अंदरूनी तकनीकी खराबियां जिम्मेदार होती हैं. जब भी कोई निर्माण अपनी सहनशक्ति खोने लगता है, तो वह विभिन्न माध्यमों से स्पष्ट चेतावनी देने लगता है. अगर वक्त रहते इन संकेतों को समझ लिया जाए और तुरंत कदम उठाए जाएं, तो जान-माल के बड़े नुकसान से आसानी से बचा जा सकता है.

इमारत के संतुलन में बदलाव के संकेत

ढांचे में गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर दरवाजे और खिड़कियों पर दिखता है. जब पिलर या नींव खिसकने लगती है, तो फ्रेम मुड़ जाते हैं और किवाड़ अचानक फंसने या जाम होने लगते हैं. इसके अलावा पूरी इमारत का हल्का सा एक तरफ झुकना या बाहरी दीवारों का सीध से बाहर होकर पेट की तरह बाहर निकलना इस बात का प्रमाण है कि लोड सही से ट्रांसफर नहीं हो रहा है. इसी तरह फर्श का ढलान अचानक बदलना या टाइलों का बीच से उभरकर चटक जाना बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है.

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इमारत गिरने से पहले कौन-कौन से संकेत देती है, दरारें कब बन जाती हैं खतरनाक

आवाज आना, सीलन और छत-दीवारों के जोड़ों में आने वाला अंतर

जब कंक्रीट और लोहे के छड़ अत्यधिक तनाव में आते हैं, तो दीवारों व छतों के अंदर से लगातार चटकने, टूटने या अजीब सी चट-चट की आवाजें सुनाई देने लगती हैं. यह इस बात का संकेत है कि अंदरूनी मसाला भार सहने में असमर्थ हो रहा है. इसके साथ ही, जहां दीवारें छत के साथ जुड़ती हैं, वहां अचानक खाली जगह या गैप बनना शुरू हो जाता है. लंबे समय से बनी सीलन, प्लास्टर का झड़ना और पानी का अंदरूनी रिसाव कंक्रीट को खोखला कर इस प्रक्रिया को और तेज कर देते हैं.

दरारें कब साधारण और कब बनती हैं खतरनाक?

हर दीवार पर दिखने वाली लाइन जानलेवा नहीं होती, इसलिए सामान्य और गंभीर दरार का अंतर समझना बेहद जरूरी है. प्लास्टर के सूखने या मामूली तापमान के उतार-चढ़ाव से आने वाली 1 से 2 मिलीमीटर पतली और सीधी रेखाएं नुकसानदेह नहीं होतीं हैं. लेकिन जब किसी दरार की चौड़ाई 5 मिलीमीटर (या 0.2 इंच) से अधिक हो जाए, तो समझ जाएं कि निर्माण की सुरक्षा खतरे में है. ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य सिविल इंजीनियर से जांच कराना अनिवार्य हो जाता है.

नींव के धंसने और मुख्य पिलर में आने वाली दरारों के लक्षण

दीवारों पर 45-डिग्री के कोण में बनने वाली तिरछी या सीढ़ीनुमा दरारें सबसे ज्यादा खौफनाक मानी जाती हैं. ये इस बात का प्रत्यक्ष सबूत हैं कि इमारत की नींव नीचे से धंस रही है या असमान रूप से बैठ रही है. सबसे ज्यादा ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि दरार दीवार के आर-पार दिखने लगे या फिर ईंटों के बजाय कंक्रीट के मुख्य बीम और कॉलम (पिलर) पर आने लगे, तो समझें कि पूरी संरचना ढहने की कगार पर है.


इमारत गिरने से पहले कौन-कौन से संकेत देती है, दरारें कब बन जाती हैं खतरनाक

लोहे में जंग और निरंतर बढ़ती सक्रिय दरारों का जोखिम

अगर दीवारों की दरारें समय के साथ लंबी और चौड़ी हो रही हों, तो उन्हें एक्टिव क्रैक्स कहा जाता है जो अत्यंत जोखिमभरी हैं. इसके अतिरिक्त जब कंक्रीट का प्लास्टर टूट-ट टूटकर गिर जाए और अंदर की लोहे की छड़ें दिखाई देने लगें जिन पर लाल रंग की जंग जम चुकी हो, तो ढांचा अपनी मूल ताकत पूरी तरह खो चुका होता है. ऐसे हालात में इमारत में रुकना मौत को दावत देने जैसा है और तुरंत उस जगह को खाली कर देना ही बुद्धिमानी है.

यह भी पढ़ें: बिल्डिंग गिरने पर Fire Brigade क्यों आई, क्या इनका काम सिर्फ आग बुझाना नहीं होता?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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