दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या हर साल बढ़ती जा रही है. जब भी सर्दियां आती हैं, धुंध और धुएं का घना कंबल शहर पर छा जाता है. हाल ही में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 311 दर्ज की गई, जो बेहद खराब श्रेणी में आती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना है, साथ ही शहर में बढ़ती कार और फैक्ट्री की धुआं भी इसे और बढ़ा देते हैं.  इस गंभीर मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई करने जा रही है. 

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ज्यादातर लोग जानते हैं कि वायु प्रदूषण इंसानों और जानवरों के लिए खतरनाक है. सांस लेने की बीमारी, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि यह हमारे पेड़-पौधों, सब्जियों और फलों के लिए भी बेहद खतरनाक है और अगर पौधे ही कमजोर हो जाएं, तो इसका असर सीधे हमारे खाने, जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि प्रदूषण बढ़ने से पेड़ों पर कैसे पड़ता है असर?

पौधों पर प्रदूषण का असर

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जब वायु प्रदूषण बढ़ता है, तो पेड़ और पौधे वातावरण में मौजूद हानिकारक केमिकल को अब्जॉर्ब कर लेते हैं. ये केमिकल उनके सामान्य कामकाज को रोक देते हैं और कई तरह के नुकसान पहुंचाते हैं. इसके परिणामस्वरूप, पौधे धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं और कभी-कभी मर भी सकते हैं.  प्रदूषण पौधों को कई तरह से प्रभावित करता है. 

1. पत्तियों को नुकसान - हवा में मौजूद ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक पौधों की पत्तियों पर सीधा हमला करते हैं. पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और क्लोरोफिल की मात्रा कम हो जाती है. इससे पौधे अपनी एनर्जी बनाने में असमर्थ हो जाते हैं और धीरे-धीरे कमजोर होकर मर सकते हैं. 

2.  फूल आने में बाधा - धुंध और प्रदूषण के संपर्क में आने वाले पौधे समय से पहले नहीं खिल पाते हैं. इसके कारण पौधे अपने सारे संसाधन जीवित रहने और प्रदूषण से लड़ने में खर्च कर देते हैं. कुछ सेंसिटिव पौधों की प्रजातियां प्रदूषण के ज्यादा लेवल पर पूरी तरह फूलना भी बंद कर देती हैं. 

3. जड़ों को नुकसान - प्रदूषण एसिड रेन और मिट्टी में हानिकारक तत्वों को बढ़ा देता है. इससे जड़ों को नुकसान पहुंचता है और पौधे जरूरी पोषक तत्व अब्जॉर्ब नहीं कर पाते हैं. कमजोर जड़ें पूरे पौधे की वृद्धि और लाइफ की शक्ति को प्रभावित करती हैं. 

4. स्टोमेटा पर प्रभाव - पत्तियों पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें स्टोमेटा कहते हैं. ये पौधे और वातावरण के बीच गैसों के आदान-प्रदान का काम करते हैं. प्रदूषण स्टोमेटा को छोटा कर देता है, जिससे फोटोसिंथेसिस और गैसों का आदान-प्रदान प्रभावित होता है.

5. ग्रोथ और डेवलपमेंट में रुकावट - प्रदूषण जैसे ओजोन और सल्फर डाइऑक्साइड पौधों की वृद्धि को धीमा कर देते हैं. फोटोसिंथेसिस प्रभावित होने से पौधों का ग्रोथ रुक जाता है, और इसके कारण फसल की पैदावार घटती है. 

6. ग्लोबल वार्मिंग में योगदान - स्वस्थ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को अब्जॉर्ब कर वातावरण को संतुलित रखते हैं. लेकिन जब पौधे प्रदूषण से प्रभावित हो जाते हैं, तो उनकी यह क्षमता कम हो जाती है. इससे वातावरण में ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं और ग्लोबल वार्मिंग तेज होती है.

बायोकेमिकल असर और आर्थिक नुकसान

प्रदूषण से पौधों की कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है, जिससे डीएनए और सेल मेम्बरेन्स डैमेज हो जाती है.  इसके परिणामस्वरूप पौधों की उम्र कम हो जाती है और उनकी पैदावार घट जाती है. फसलों की कम पैदावार से किसानों को आर्थिक नुकसान होता है और फूड सुरक्षा पर असर पड़ता है. गेहूं, सोयाबीन, फलियां, सब्जियां और फल  सभी संवेदनशील हैं. इसके चलते पोषण में कमी आती है और खाने की क्वालिटी भी प्रभावित होती है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.