Summer Fires: पूरे भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है और आग लगने की घटनाएं आम हो चुकी हैं. बीते कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में आग लगने की बड़ी घटनाएं सामने आई हैं. दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल और रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग और नोएडा की एक ऊंची रिहायशी इमारत में लगी आग जैसी घटनाओं ने एक बार फिर गर्मी के मौसम में होने वाले खतरों को दिखाया है. इसी बीच आइए जानते हैं उन पांच बड़ी वजहों के बारे में जिनकी वजह से आग लग सकती है.

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 एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का लगातार इस्तेमाल 

गर्मी के मौसम में सबसे आम गलतियों में से एक है एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों को बिना आराम दिए लंबे समय तक लगातार चलाना. गर्मी के चरम पर कई घरों में लोग गर्मी से बचने के लिए अपने एयर कंडीशनर को 24 घंटे चालू रखते हैं. 

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लगातार चलने की वजह से कंप्रेसर और मोटर काफी ज्यादा दबाव में आ जाते हैं जिस वजह से वह ज्यादा गर्म हो जाते हैं. हाल की कई घटनाओं में ज्यादा गर्मी होने की वजह से एयर कंडीशनर में खराबी, शॉर्ट सर्किट और यहां तक कि धमाके होने की भी खबरें सामने आई हैं. थोड़ी-थोड़ी देर पर बंद करने और सही रखरखाव से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

खराब वायरिंग और बिजली का ज्यादा लोड 

गर्मी के मौसम में बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि घरों में एक साथ कई ज्यादा बिजली लेने वाले उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं. पुराने या फिर कम क्षमता वाली वायरिंग पर एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, पानी के पंप और दूसरे उपकरण चलाने से गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं. 

वोल्टेज में उतार चढ़ाव और ओवरलोड सर्किट अक्सर बिजली के सिस्टम में काफी ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं. अगर वायरिंग खराब है, ढीली है या फिर ठीक से नहीं लगाई गई तो कुछ ही सेकंड में शॉर्ट सर्किट हो सकता है. इससे बड़ी आग लग सकती है. 

उपकरणों की सर्विसिंग को नजरअंदाज करना 

काफी लोग गर्मी के मौसम में कूलिंग उपकरणों की पहले से जांच कराए बिना ही उनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर देते हैं. एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और इलेक्ट्रिकल पैनल को सुरक्षित रूप से काम करने के लिए समय-समय पर रखरखाव की जरूरत होती है. धूल जमने, फिल्टर बंद होने और आउटडोर यूनिट ब्लॉक होने से हवा का बहाव रुक सकता है. इसी के साथ उपकरणों के अंदर दबाव भी बढ़ सकता है. समय के साथ इससे उपकरण ज्यादा गर्म हो जाते हैं, कंप्रेसर खराब हो सकता है या फिर बिजली की खराबी हो सकती है. इसी से आग लग सकती है. 

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गैस लीक और खाना पकाने में सुरक्षा को नजरअंदाज करना

गर्मी के मौसम में रसोई भी एक ज्यादा जोखिम वाली जगह बन जाती है. सिलेंडर, रेगुलेटर या फिर पाइपलाइन से गैस के मामूली रिसाव को भी कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ज्यादा तापमान की वजह से ज्वलनशील गैस बंद जगह में तेजी से फैलती हैं. इसके अलावा बिना निगरानी के छोड़ा गया खाना पकाने का तेल जल्द ही खतरनाक तापमान पर पहुंच सकता है और उसमें आग लग सकती है. थोड़ी सी भी गैस लीक या फिर ध्यान भटकने से कुछ ही मिनट के अंदर बड़ी आपातकालीन स्थिति पैदा हो सकती है. 

आसानी से आग पकड़ने वाली चीजों को सीधी धूप में छोड़ना 

रोजमर्रा की कई चीजें तेज गर्मी के संपर्क में आने पर खतरनाक हो सकती हैं. हैंड सैनीटाइजर, परफ्यूम, लाइटर, पावर बैंक, पेंट के डिब्बे और केमिकल सॉल्वेंट जैसी चीजों को कभी भी पार्क की गई गाड़ियों के अंदर या फिर सीधी धूप में नहीं छोड़ना चाहिए. 

गर्मियों में बंद गाड़ियों के अंदर का तापमान अक्सर आसानी से 50 से 60 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो सकता है. इतनी ज्यादा गर्मी से बैटरी और केमिकल वाले डिब्बे के अंदर दबाव बढ़ सकता है, जिससे उनमें लीकेज हो सकती है और वे फट सकते हैं.

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