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Delhi Malviya Nagar Fire: भारत में हर घंटे कितने लोग जिंदा जलकर मर जाते हैं? डराने वाले हैं मौत के ये आंकड़े

भारत में हर साल आगजनी की हजारों घटनाएं होती हैं, जिनमें भारी संख्या में लोग जान गंवाते हैं. समय के हिसाब से यह आंकड़ा प्रति घंटे के स्तर पर भी बेहद डरावना है, जो लचर सुरक्षा व्यवस्था को उजागर करता है.

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  • वैश्विक औसत से भारत में आग से मौत की दर चिंताजनक.

Delhi Malviya Nagar Fire: दिल्ली के मालवीय नगर में हुआ भीषण होटल अग्निकांड देश में आग से सुरक्षा के इंतजामों पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है. इस दर्दनाक हादसे में 21 मासूम लोगों ने तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा दी. अस्पताल के करीब होने के कारण इलाज कराने आए मरीजों और विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहने वाला यह होटल चंद मिनटों में श्मशान में तब्दील हो गया. इसी क्रम में चलिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के जरिए जानें कि देश में हर घंटे कितने लोग जिंदा जलकर मर रहे हैं. 

मालवीय नगर होटल हादसे की दर्दनाक इनसाइड स्टोरी

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाका में हुए इस खौफनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. यह होटल पास में ही स्थित मैक्स हॉस्पिटल के बिल्कुल करीब था, जिसकी वजह से अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीज, उनके तीमारदार और कई विदेशी पर्यटक अक्सर इसी होटल में ठहरते थे. आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और विदेशी मेहमानों सहित कई लोग इसके आगोश में आ गए. 

हर घंटे मौत का खौफनाक सरकारी आंकड़ा

इस हादसे ने देश में आगजनी से होने वाली मौतों के उस कड़वे सच को दोबारा सामने ला दिया है, जो बेहद डरावना है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में हर साल आग लगने की घटनाओं से औसतन 12,000 से लेकर 27,000 लोगों की दर्दनाक मौत हो जाती है. अगर इस सालाना आंकड़े को समय के हिसाब से समझें, तो देश में हर घंटे लगभग 1.5 से लेकर 3 लोग जिंदा जलकर दम तोड़ देते हैं. कई मेडिकल और स्वतंत्र शोध रिपोर्टों का दावा है कि असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है.

यह भी पढ़ें: Delhi Malviya Nagar Fire: दिल्ली अग्निकांड में 21 जिंदा जले, जानें बिल्डिंग में आग लगने पर कैसे बचा सकते हैं अपनी जान?

चिकित्सा और शोध रिपोर्टों का दावा और खतरनाक

हैरानी की बात यह है कि जहां सरकारी तंत्र यानी NCRB साल भर में अधिकतम 27,000 मौतों की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ देश-विदेश की कई स्वतंत्र चिकित्सा और शोध रिपोर्टों का अनुमान इससे कहीं ज्यादा अलग और बड़ा है. विभिन्न हेल्थ रिसर्च और मेडिकल जर्नल्स में छपे अध्ययनों का दावा है कि भारत में आगजनी के कारण मरने वालों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी फाइलों में दर्ज संख्या से काफी अधिक है. कई बार ग्रामीण इलाकों में होने वाले हादसों की सही रिपोर्टिंग न होना भी इसकी बड़ी वजह है.

सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी बनती है काल

देश में आगजनी के मामलों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी और इसके कारण जाने वाली मासूमों की जान के पीछे सबसे बड़ी वजह सुरक्षा उपायों की भारी कमी है. ज्यादातर कमर्शियल और रिहायशी इमारतों में फायर एनओसी, इमरजेंसी एग्जिट और आग बुझाने वाले उपकरणों का अभाव होता है. कानून होने के बावजूद लोग नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य करते हैं. 

वैश्विक औसत के मुकाबले भारत की चिंताजनक स्थिति

अगर हम भारत में आग से होने वाली मौतों की तुलना दुनिया के दूसरे विकसित या विकासशील देशों से करें, तो हमारा देश काफी पीछे नजर आता है. 'इंडियाज फायर डेथ्स वर्सेस ग्लोबल एवरेज' की रिपोर्टों के अनुसार, भारत में प्रति लाख आबादी पर आग से मरने वालों की दर दुनिया के औसत मुकाबले बहुत खराब है. विदेशों में जहां मामूली आग लगने पर भी हाई-टेक सिस्टम तुरंत एक्टिव हो जाते हैं, वहीं हमारे यहां ज्यादातर मामलों में दमकल की गाड़ियों के पहुंचने तक सब कुछ जलकर स्वाहा हो जाता है.

यह भी पढ़ें: Delhi Malviya Nagar Fire: मालवीय नगर अग्निकांड में विदेशी नागरिकों की भी मौत, क्या उन्हें भी मिलेगा मुआवजा? जानें नियम

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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