दिल्ली NCR में बदलते मौसम के साथ ही हवा तेजी से जहरीली होने लगी है. बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI अचानक 300 के पार दर्ज किया गया है, जो बेहद 'खराब' श्रेणी में आता है. हवा की गिरती क्वालिटी को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट CAQM ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का पहला चरण GRAP-1 लागू कर दिया है.

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सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है और कई सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. आइए जानते हैं कि ग्रैप-1 लागू होने के बाद अब दिल्ली-एनसीआर में किन चीजों पर पाबंदी रहेगी और आम जनता पर इसका क्या असर पड़ेगा.

तापमान में गिरावट और मौसम का हाल

भारत मौसम विज्ञान विभाग IMD के अनुसार, दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत से कम है. इसके अलावा दिल्ली के अन्य इलाकों जैसे पालम में न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री कम है.

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वहीं, लोधी रोड में न्यूनतम तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस, रिज में 19.1 डिग्री सेल्सियस और आयानगर में न्यूनतम तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. ठंड की शुरुआत के साथ हवा की गति धीमी पड़ने के कारण धूल और धुएं के कण जमीन के नजदीक जमने लगे हैं.

आउटडोर कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ पर पूरी तरह रोक

धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण और तोड़-फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है. दिल्ली-NCR में 30 नवंबर तक खुले में किसी भी प्रकार के आउटडोर डिमोलिशन पर पूरी तरह रोक रहेगी.

इसके बाद भी 31 जनवरी तक किसी भी तरह के तोड़-फोड़ के कामों पर पाबंदी जारी रहेगी. धूल को उड़ने से रोकने के लिए कंस्ट्रक्शन साइट्स पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट-स्प्रे यूनिट चलाना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों की अनदेखी करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

होटल और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल पर पूरी रोक

ग्रैप-1 लागू होने के बाद सबसे बड़ा असर खान-पान की दुकानों और होटलों पर पड़ता है. नए नियमों के तहत अब दिल्ली-एनसीआर के किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या सड़क किनारे लगने वाले खुले फूड स्टॉल पर कोयले या लकड़ी का इस्तेमाल करने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है. कमर्शियल रसोईघरों में अब केवल एलपीजी, बिजली या अन्य स्वच्छ ईंधन वाले उपकरणों का ही उपयोग किया जा सकेगा, ताकि कोयले से निकलने वाले धुएं से हवा को और ज्यादा जहरीला होने से बचाया जा सके.

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डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर पाबंदी

बिजली कटौती के दौरान इस्तेमाल होने वाले डीजल जनरेटर पर भी रोक लगा दी गई है. ग्रैप-1 के नियमों के अनुसार, अब सामान्य बिजली आपूर्ति के लिए डीजल जनरेटरों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इन्हें केवल बेहद जरूरी या आपातकालीन स्थितियों में ही चलाने की अनुमति होगी.

प्रशासन धूल और जाम से निपटने के लिए सड़कों की एंड-टू-एंड री-कारपेटिंग करा रहा है और AI बेस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में कारपूलिंग अपनाएं और खुले में कचरा जलाने से बचें.

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