भारतीय सेना की सुरक्षा प्रणाली में हाल ही में शामिल हुई भैरव कमांडो बटालियन आज के समय में देश की सबसे उन्नत और फुर्तीली ताकतों में से एक है. साल 2026 में पूरी तरह सक्रिय हुई इस विशेष टुकड़ी को कठिन से कठिन परिस्थितियों में तुरंत कार्रवाई करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. लेकिन इनकी वीरता और खतरनाक ऑपरेशनों के अलावा अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इन जांबाज भैरव कमांडोज को भी सेना के अन्य जवानों की तरह शराब का कोटा मिलता है. आइए जानते हैं कि इस बेहद नई और आधुनिक फोर्स के लिए सेना में शराब वितरण और कैंटीन के क्या नियम तय किए गए हैं.
क्या होता है भैरव कमांडोज का शराब कोटा?
भैरव लाइट कमांडो बटालियन भारतीय सेना की एक उच्च प्रशिक्षित इन्फैंट्री यूनिट है. सेना के कड़े नियमों के तहत इस यूनिट के कमांडो भी रक्षा बलों के अन्य सैन्य कर्मियों की तरह कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) से रियायती दरों पर मिलने वाली शराब के पूरी तरह हकदार हैं. हालांकि, सेना में शराब वितरण का यह कोटा केवल यूनिट के नाम पर नहीं दिया जाता, बल्कि यह पूरी तरह से कमांडो के पद यानी रैंक के आधार पर तय होता है. इसका सीधा मतलब यह है कि कमांडो जिस पद पर तैनात होगा, उसे उसी हिसाब से हर महीने एक निश्चित मात्रा में शराब खरीदने की अनुमति दी जाती है.
रैंक के हिसाब से कितनी बोतलें मिलती हैं?
भैरव कमांडो बटालियन में तैनात जवानों और अधिकारियों के लिए मौजूदा मानदंडों के आधार पर कोटा तय किया गया है. बटालियन में शामिल अन्य रैंक के जवानों और नॉन-कमीशंड अधिकारियों (ORs/NCOs) को आमतौर पर हर महीने 4 से 5 बोतल (750 मिली) शराब खरीदने की इजाजत होती है. वहीं जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) के लिए यह मासिक कोटा 6 से 7 बोतल का तय किया गया है. इसके अलावा बटालियन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हर महीने 10 बोतल तक शराब खरीदने का अधिकार होता है. इस नियम का मुख्य उद्देश्य सभी स्तरों पर एक पारदर्शी और अनुशासित व्यवस्था बनाए रखना है.
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स्मार्ट कार्ड और डिजिटल ट्रैकिंग का कड़ा नियम
भैरव कमांडोज को मिलने वाली इस सुविधा में सुरक्षा और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाता है. CSD कैंटीन से शराब का कोटा केवल एक विशेष स्मार्ट कार्ड के माध्यम से ही लिया जा सकता है. हर कमांडो के पास अपना एक अलग कार्ड होता है, जिससे खरीदारी के समय डिजिटल ट्रैकिंग की जाती है. इस डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से सेना यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी कमांडो अपने तय मासिक कोटे से अधिक शराब की खरीदारी न कर सके. साथ ही, कैंटीन से रियायती दरों पर खरीदी गई यह शराब केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए होती है और इसे किसी दूसरे व्यक्ति को बेचना सख्त गैरकानूनी माना जाता है.
बदले हुए नए नियम और प्रीमियम शराब की सीमा
हाल के वर्षों में सेना ने कैंटीन नियमों को काफी लचीला और आधुनिक बनाया है, जिसका सीधा फायदा भैरव कमांडोज को भी मिल रहा है. नए नियमों के मुताबिक, अब ये कमांडो देश में मौजूद अपने नजदीकी किसी भी CSD कैंटीन से अपना मासिक कोटा आसानी से ले सकते हैं. इसके अलावा यदि कोई कमांडो 2,000 रुपये से अधिक मूल्य की प्रीमियम शराब खरीदना चाहता है, तो उस पर कोटे की 50 प्रतिशत की सीमा लागू होती है. इन कड़े और स्पष्ट नियमों के जरिए सेना यह सुनिश्चित करती है कि देश की सबसे संवेदनशील सीमाओं पर तैनात इन वीर कमांडोज की सुख-सुविधाओं का ध्यान रखने के साथ-साथ अनुशासन भी पूरी तरह कायम रहे.
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