आज दुनिया भर में क्रिकेट का जो रोमांच हम देखते हैं, उसकी असल जान गेंदबाजों की रफ्तार और उनकी घूमती हुई गेंदें हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमेशा से क्रिकेट में ऐसे गेंद नहीं फेंकी जाती थी? शुरुआत में गेंदबाज आज की तरह हाथ घुमाकर नहीं, बल्कि जमीन से सटाकर गेंद को लुढ़काते थे. नियमों के टकराव, अंपायरों के फैसलों और खिलाड़ियों के विरोध से गुजरते हुए आखिरकार क्रिकेट को उसकी आधुनिक गेंदबाजी मिली, जिसने इस खेल का पूरा रोमांच ही बदल कर रख दिया. आइए जानें कि मॉर्डन बॉलिंग की शुरुआत कब हुई.

Continues below advertisement

रफ्तार और ताकत का असली विज्ञान

क्रिकेट के मैदान पर जब कोई गेंदबाज पूरा हाथ घुमाकर गेंद फेंकता है, तो इसके पीछे विज्ञान और ताकत का एक बड़ा तालमेल काम करता है. कंधे के पीछे से पूरे हाथ को घुमाकर एक बड़ा चक्र या आर्क बनाया जाता है. ऐसा करने से गेंदबाज को अपनी मांसपेशियों की पूरी ताकत का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है. इससे शरीर में एक गतिज ऊर्जा पैदा होती है, जो रन-अप की गति के साथ मिलकर गेंद को बेहद तेज रफ्तार और जबरदस्त उछाल देती है.

Continues below advertisement

हवा में स्विंग और कलाई का कमाल

हाथ को ऊपर से नीचे की तरफ बिल्कुल सीधा घुमाने का एक बड़ा फायदा यह होता है कि इससे गेंदबाज को अपनी कलाई की स्थिति पर पूरा नियंत्रण मिलता है. जब कलाई सही दिशा में होती है, तो गेंदबाज गेंद की सिलाई यानी सीम को हवा में अपनी मर्जी के मुताबिक रख सकता है. इसी तकनीक की बदौलत तेज गेंदबाजों को हवा में गेंद को चमकाने यानी स्विंग कराने में मदद मिलती है, जबकि स्पिन गेंदबाज इसी ऊंचे एंगल का फायदा उठाकर पिच पर गेंद को घुमा पाते हैं.

गेंदबाजी में हाथ को कितना घुमा सकते हैं?

क्रिकेट के खेल में नियमों का पालन सबसे जरूरी माना जाता है. मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी के नियमों के मुताबिक, कोई भी गेंदबाज गेंद फेंकते समय अपनी कोहनी को एक तय सीमा से ज्यादा नहीं मोड़ सकता है. अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे चकिंग या अवैध एक्शन माना जाता है. पूरा हाथ घुमाकर गेंद फेंकने की यह खास तकनीक गेंदबाजों को अपनी कोहनी को गैर-कानूनी तरीके से मोड़ने से रोकती है, जिससे वे बिना किसी नो-बॉल के डर के सही तरीके से गेंदबाजी कर पाते हैं.

यह भी पढ़ें: भारत से नीदरलैंड कैसे पहुंच गए थे चोल साम्राज्य के ऐतिहासिक दस्तावेज, जो अब लाए जाएंगे वापस?

कभी जमीन पर लुढ़कती थी गेंद

मॉडर्न बॉलिंग का इतिहास जानने के लिए हमें क्रिकेट के शुरुआती दिनों में जाना होगा, जब केवल अंडरआर्म यानी हाथ को नीचे रखकर गेंदबाजी करने का चलन था. उस दौर में गेंदबाज गेंद को हवा में फेंकने के बजाय सीधे जमीन पर लुढ़काते हुए बल्लेबाज तक पहुंचाते थे. उस समय की पिचें भी बहुत उबड़-खाबड़ होती थीं. लेकिन जैसे-जैसे समय बदला और खेल के मैदान बेहतर होने लगे, बल्लेबाजों ने इन लुढ़कती गेंदों पर आसानी से खूब सारे रन बनाने शुरू कर दिए.

कैसे हुई राउंडआर्म की शुरुआत

जब बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल हो गया, तब गेंदबाजों ने नए रास्ते तलाशने शुरू किए. इसी कोशिश में 1800 के दशक में राउंडआर्म गेंदबाजी का जन्म हुआ. इस तकनीक में गेंदबाज अपने हाथ को कंधे के बिल्कुल समानांतर यानी सीधा रखकर गेंद फेंकते थे. इतिहास बताता है कि इस अनोखी शैली की शुरुआत केंट के रहने वाले जॉन विल्स और उनकी बहन क्रिस्टीना विल्स ने की थी. क्रिस्टीना को अपने घेरदार कपड़ों की वजह से नीचे से गेंद फेंकने में दिक्कत होती थी, इसलिए उन्होंने हाथ को थोड़ा ऊपर उठाकर फेंकना शुरू किया.

जब मैदान पर हुआ भारी विवाद

राउंडआर्म की इस नई तकनीक ने क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा तहलका मचा दिया. कई सालों तक इस बात को लेकर विवाद चलता रहा कि हाथ को कितना ऊपर उठाया जा सकता है. अंपायरों ने कई बार इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए नो-बॉल देना शुरू कर दिया. इस बात से नाराज होकर कई गेंदबाज और टीमें मैदान छोड़कर बाहर तक चली गईं. क्रिकेट जगत इस बात को लेकर दो धड़ों में बंट गया था कि खेल का यह नया तरीका सही है या गलत.

1864 में हुआ मॉडर्न बॉलिंग का जन्म

तमाम विवादों और बहसों के बाद आखिरकार क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब को झुकना पड़ा. साल 1864 में एमसीसी ने आधिकारिक तौर पर नियमों में बदलाव करते हुए ओवरआर्म यानी हाथ को कंधे से ऊपर ले जाकर गेंद फेंकने को कानूनी मंजूरी दे दी. क्रिकेट के इतिहास में इसी साल को असल मायनों में मॉडर्न बॉलिंग का जन्मवर्ष माना जाता है. इस फैसले ने गेंदबाजों को एक नई आजादी दी और खेल को पूरी तरह से बदल दिया.

तेज गेंदबाजी के दिग्गजों का उदय

ओवरआर्म बॉलिंग को मंजूरी मिलते ही गेंदबाजों को गेंद में भयानक रफ्तार और खतरनाक उछाल पैदा करने की ताकत मिल गई. 20वीं सदी में इस तकनीक का इस्तेमाल करके डेनिस लिली, जेफ थॉम्पसन जैसे गेंदबाजों ने बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा किया. इसके बाद पाकिस्तान के वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे दिग्गजों ने इस एक्शन के साथ पुरानी गेंद को हवा में चमकाने की कला यानी रिवर्स स्विंग को दुनिया के सामने लाकर एक नया इतिहास रच दिया.

यह भी पढ़ें: Sweden Import Garbage: दूसरे देशों से कचरा क्यों इंपोर्ट करता है स्वीडन, इसका करता क्या है? आज यहीं PM Modi का दौरा