इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग भयावह होती जा रही है. आए दिन हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों में दोनों तरफ की सेनाओं को भारी क्षति पहुंच रही है और बहुत से सैनिक मारे भी जा रहे हैं. ऐसे में ईरान ने सेना भर्ती के नियमों में बदलाव किए हैं. ईरान में सेना में भर्ती होने की उम्र घटाई गई है, जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या यहां सेना में भर्ती होना जरूरी है? इसके अलावा दुनिया के वे कौन से देश हैं जहां कंपल्सरी मिलिट्री सर्विस का नियम लागू है और भारत में इसको लेकर क्या नियम है?  

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ईरान- इजराइल में मिलिट्री के नियम

सबसे पहले इजराइल की बात करते हैं, यहां हर नौजवान चाहे लड़का हो या लड़की सबके लिए सेना में काम करना जरूरी है. आमतौर पर पुरुषों को 32 महीने और महिलाओं को 24 महीने तक सेना में सेवा देनी पड़ती है. इजराइल के आस-पास के खतरों को देखते हुए यह नियम बहुत कड़ा कर दिया गया है. इसके अलावा ईरान की बात करें तो वहां भी कड़े नियम हैं, यहां 18 साल की उम्र को पार करते ही हर पुरुष के लिए लगभग 2 साल तक मिलिट्री सर्विस करना जरूरी होता है.

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दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों में नियम 

इसके अलावा दक्षिण कोरिया की बात करें तो, वहां उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरे की वजह से हर पुरुष को लगभग 18 से 21 महीने तक सेना में काम करना पड़ता है. इसके अलावा स्विट्ज़रलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे जैसे यूरोपीय देशों में भी सेना में सेवा देना ज़रूरी है. हालांकि हर देश में इसके नियम और सेना में काम करने का समय अलग-अलग होते है. 

भारत में क्या स्थिति है?

भारत में सेना में सेवा देना जरूरी नहीं है. यहां सेना में भर्ती पूरी तरह से अपनी स्वयं की इच्छा से, मतलब जो अपनी मर्ज़ी से देश की सेवा करना चाहता है, वही आवेदन करता है. हालांकि, अग्निपथ योजना जैसी नई योजनाओं के ज़रिए युवाओं को कम समय के लिए सेना से जुड़ने का मौका ज़रूर दिया जा रहा है, जिसके तहत युवाओं को 4 साल के लिए सेना में शामिल होने का मौका मिलता है, इसका मकसद देश की सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश  है. 

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