दुनिया के ताकतवर देशों में धरती के नीचे, समुद्र की गहराइयों में और आसमान की ऊंचाइयों पर ऐसी खामोश तैयारियां चल रही हैं, जो पलक झपकते ही सब कुछ मिटा सकती हैं. बड़े-बड़े देश अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि दुश्मन को पलक झपकते खत्म कर देने की क्षमता बढ़ा रहे हैं. इनमें सबसे खतरनाक है न्यूक्लियर ट्राइएड, यानि एक ही देश तीन दिशाओं से परमाणु हमला कर सकता है. सवाल ये है कि आखिर कौन‑कौन से देश इस मौत के तिकोनिया सिस्टम के मालिक हैं?

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क्या है न्यूक्यिर ट्राइएड

न्यूक्लियर ट्राइएड को समझने की सबसे आसान परिभाषा यह है कि किसी देश के पास मिसाइल दागने के तीन वेपन-प्लेटफॉर्म मौजूद हों, जैसे- जमीन आधारित इंटर-कॉन्टिनेंटल मिसाइलें, समुद्र से फायर होने वाली मिसाइलें और ऐसे बॉम्बर्स जो हवा से न्यूक्लियर हमला कर सकें. ये तीनों मिलकर उस देश को ऐसी सुरक्षा देते हैं कि किसी भी एक प्लेटफॉर्म पर हमला कर उसे निष्क्रिय भी कर दिया जाए, तो बाकी दोनों सक्रिय रहकर जवाबी हमला कर सकें.

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अमेरिका

इसी वजह से दुनिया में केवल कुछ गिने-चुने देश ही इस सामरिक व्यवस्था को हासिल कर सके हैं. सबसे पहला नाम आता है अमेरिका का. कोल्ड वॉर के समय से अमेरिका ने सबसे पहले पूरी तरह विकसित ट्राइएड सिस्टम बनाया था. उसके पास मिनटमैन III ICBM जैसी लंबी दूरी वाली मिसाइलें हैं, ओहियो क्लास की मिसाइल सबमरीन हैं और B52 व B2 बॉम्बर जैसे घातक विमान मौजूद हैं. यह संयोजन अमेरिका को हर दिशा से रणनीतिक बढ़त देता है.

रूस

दूसरा सबसे शक्तिशाली ट्राइएड रूस का है. रूस के पास दुनिया में सबसे बड़ा परमाणु भंडार है और इसके साथ ही अत्याधुनिक ट्राइएड सिस्टम भी. सर्मत RS‑24 जैसी मिसाइलें जमीन से फायर की जा सकती हैं, बोरेई क्लास सबमरीन समुद्र से हमला कर सकती हैं और Tu‑160 तथा Tu‑95MS बॉम्बर्स हवा में मौत लेकर उड़ने के लिए तैयार रहते हैं. यही कारण है कि रूस को ट्राइएड के मामले में दुनिया की सबसे मजबूत शक्ति माना जाता है.

चीन

पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है चीन का न्यूक्लियर ट्राइएड. उसने DF‑41 जैसी मिसाइलों के जरिए जमीन आधारित क्षमता बढ़ाई है, जबकि जिन-क्लास बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन JL‑2 और JL‑3 मिसाइलों से लैस हैं। हवा से हमले के लिए चीन के पास H‑6 बॉम्बर्स उपलब्ध हैं और वह अगली पीढ़ी का H‑20 बॉम्बर बना रहा है, जिससे उसकी क्षमता और भी बढ़ जाएगी.

भारत

भारत ने भी पिछले कुछ सालों में न्यूक्लियर ट्राइएड को पूरा कर लिया है और यह दक्षिण एशिया में एक विशाल रणनीतिक संतुलन स्थापित करता है. भारत के पास अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं, जिन्हें जमीन से लॉन्च किया जा सकता है. हवा से हमला करने के लिए भारत के पास ऐसे फाइटर जेट हैं जो न्यूक्लियर वेपन कैरी कर सकते हैं. सबसे खास है आईएनएस अरिहंत-भारतीय नौसेना की बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन, जो पानी की गहराइयों से घातक परमाणु हमला करने में सक्षम है.

फ्रांस और यूके

इन चार देशों के अलावा फ्रांस और यूके के पास भी दो‑प्लेटफॉर्म परमाणु क्षमता है, लेकिन पूर्ण न्यूक्लियर ट्राइएड का दर्जा दुनिया में अभी कुछ ही देशों को मिलता है. यह एक ऐसा सिस्टम है जो न सिर्फ हमले की ताकत बढ़ाता है, बल्कि किसी भी दुश्मन को हतोत्साहित करता है कि वह पहले हमला करने की गलती न करे.

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