बीते कुछ समय से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान पर दबाव बना हुआ है. ऐसे माहौल में स्वाभाविक है कि ईरान के सुप्रीम लीडर की सुरक्षा को लेकर अटकलें तेज हों. कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि हालात बिगड़ने पर खामेनेई के पास देश छोड़ने जैसी वैकल्पिक योजनाएं हो सकती हैं, हालांकि ईरानी नेतृत्व की ओर से ऐसी बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
वहीं बीते दिनों वेनेजुएला के राष्ट्रपति को ट्रंप ने गिरफ्तार कर लिया, ऐसे में एक सवाल है कि क्या कोई बाहरी ताकत तेहरान तक पहुंच सकती है? या फिर खामेनेई के चारों ओर बनी सुरक्षा की परतें हर खतरे को पहले ही रोक देती हैं? आइए खामेनेई की सुरक्षा के बारे में जानें.
खामेनेई की सुरक्षा कौन करता है
अयातुल्ला अली खामेनेई की सुरक्षा किसी सामान्य सैन्य या पुलिस यूनिट के भरोसे नहीं है. उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी Sepah-e Vali-ye Amr यानी वली-ए-अम्र फोर्स के पास होती है. यह यूनिट ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की सबसे खास और गोपनीय इकाइयों में गिनी जाती है. वली-ए-अम्र का अर्थ ही होता है ‘आदेश देने वाले की रक्षा करने वाली सेना’, और ईरान में यह आदेश देने वाला सुप्रीम लीडर होता है.
कब और क्यों बनी वली-ए-अम्र फोर्स
इस यूनिट की स्थापना 1980 के दशक के मध्य में की गई थी. ईरान-इराक युद्ध के बाद नेतृत्व को यह एहसास हुआ कि सुप्रीम लीडर की सुरक्षा के लिए एक अलग, पूरी तरह समर्पित और भरोसेमंद फोर्स जरूरी है. तभी से वली-ए-अम्र फोर्स सीधे सुप्रीम लीडर के कार्यालय के अधीन काम करती है और किसी दूसरी संस्था को जवाबदेह नहीं होती है.
कितने जवान और कैसी चयन प्रक्रिया
रिपोर्ट्स बताती हैं कि वली-ए-अम्र फोर्स में करीब 10 से 12 हजार चुनिंदा जवान होते हैं. इनमें भर्ती होना आसान नहीं है. इसमें चयन प्रक्रिया कई स्तरों पर होती है, जिसमें शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती, वैचारिक निष्ठा और लंबा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन शामिल होता है. इसमें केवल वही लोग चुने जाते हैं जिन पर सिस्टम को पूरी तरह भरोसा होता है.
सिर्फ बॉडीगार्ड नहीं, ऑलराउंड सुरक्षा
वली-ए-अम्र के जवान केवल गन लेकर चलने वाले बॉडीगार्ड नहीं होते हैं. इन्हें मल्टी-लेवल ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें वीआईपी प्रोटेक्शन, खतरे की पहले से पहचान, काउंटर इंटेलिजेंस, भीड़ नियंत्रण और इमरजेंसी रिस्पॉन्स जैसी ट्रेनिंग शामिल होती है. इसके अलावा आधुनिक दौर की जरूरतों को देखते हुए साइबर सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी से जुड़े खतरों को समझने की ट्रेनिंग भी दी जाती है.
कितनी कठोर होती है इनकी ट्रेनिंग
इस यूनिट की ट्रेनिंग को ईरान की सबसे कठिन ट्रेनिंग में गिना जाता है. ट्रेनिंग का मकसद सिर्फ शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि दबाव में सही फैसला लेने की क्षमता विकसित करना होता है. जवानों को लंबे समय तक अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की आदत डलवाई जाती है, ताकि वे किसी भी हालात में घबराएं नहीं. उनको बताया जाता है कि ट्रेनिंग के दौरान मानसिक सहनशक्ति पर खास जोर दिया जाता है.
गोपनीयता ही सबसे बड़ा हथियार
वली-ए-अम्र फोर्स की सबसे बड़ी ताकत इसकी गोपनीयता है. इसके ऑपरेशन, तैनाती और आंतरिक ढांचे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है. यही वजह है कि इस यूनिट को लेकर बाहर बहुत कम ठोस जानकारी उपलब्ध है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गोपनीयता ही किसी भी संभावित खतरे को कमजोर बना देती है.
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