Congress First CWC Meeting: बीते दिनों 27 दिसंबर को राजधानी दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के शीर्ष और अनुभवी नेताओं ने शिरकत की. इस बैठक के दौरान प्रस्तावित ग्रामीण रोजगार योजना ‘G RAM G’, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और बांग्लादेश से जुड़े मौजूदा हालात सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विस्तार से मंथन किया गया. आइए जान लेते हैं कि आखिर कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की पहली बैठक कब हुई थी और इसमें आखिर कौन-कौन शामिल हुआ था.

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कांग्रेस वर्किंग कमेटी की जरूरत क्यों पड़ी

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी, लेकिन शुरुआती दशकों में कांग्रेस साल में सिर्फ एक बार अधिवेशन करती थी. तीन-चार दिन प्रस्ताव पास होते और फिर संगठन अगले साल तक लगभग निष्क्रिय रहता था. महात्मा गांधी ने महसूस किया कि अगर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देनी है तो कांग्रेस को एक स्थायी और सक्रिय नेतृत्व की जरूरत है, जो पूरे साल फैसले ले सके और आंदोलन को जमीन पर उतार सके.

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दिसंबर 1920: नागपुर अधिवेशन और बड़ा बदलाव

कांग्रेस के इतिहास में दिसंबर 1920 का नागपुर अधिवेशन निर्णायक साबित हुआ. इस अधिवेशन की अध्यक्षता सी. विजयराघवाचार्य ने की थी. इसी अधिवेशन में कांग्रेस के संविधान में मौलिक बदलाव किए गए. महात्मा गांधी के प्रस्ताव पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC के गठन को मंजूरी दी गई. 15 सदस्यों वाली इस समिति को कांग्रेस का सर्वोच्च कार्यकारी निकाय बनाया गया, जिसे कई इतिहासकार कांग्रेस का ‘कैबिनेट’ भी कहते हैं.

पहली CWC बैठक कब हुई

हालांकि कांग्रेस वर्किंग कमेटी का गठन दिसंबर 1920 में हो गया था, लेकिन इसकी पहली पूर्ण और औपचारिक बैठक 31 जनवरी 1921 को कलकत्ता में शुरू हुई. यह बैठक 3 फरवरी 1921 तक चली. यह वही दौर था जब देश में असहयोग आंदोलन तेजी से फैल रहा था और ब्रिटिश सरकार पर जन दबाव बढ़ता जा रहा था. इस बैठक ने कांग्रेस को एक आंदोलनकारी संगठन के रूप में स्थापित कर दिया.

पहली बैठक में कौन-कौन था मौजूद

इस ऐतिहासिक पहली बैठक में उस दौर के लगभग सभी बड़े राष्ट्रीय नेता मौजूद थे. महात्मा गांधी इस कमेटी की आत्मा माने जाते थे. उनके साथ मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, चितरंजन दास, पंडित मदन मोहन मालवीय, राजेंद्र प्रसाद और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे. ये वही नाम थे जो आगे चलकर स्वतंत्र भारत की राजनीति और प्रशासन की रीढ़ बने.

असहयोग आंदोलन को मिली दिशा

कलकत्ता में हुई पहली बैठक का सबसे अहम एजेंडा असहयोग आंदोलन था. इसी बैठक में तय किया गया कि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को संगठित तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा. कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने प्रांतीय समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आंदोलन को अनुशासित और अहिंसक बनाए रखा जाए.

कांग्रेस का संगठनात्मक विस्तार

इस पहली बैठक में कांग्रेस को आम जनता से जोड़ने पर भी जोर दिया गया. सदस्यता शुल्क घटाया गया ताकि किसान, मजदूर और आम लोग कांग्रेस से जुड़ सकें. संगठन को जिला और गांव स्तर तक ले जाने की योजना बनी. यही वह फैसला था जिसने कांग्रेस को अभिजात्य क्लब से जन आंदोलन में बदल दिया.

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