Commonwealth Games vs Olympics: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 मेडल जीते. इनमें 8 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज हैं. हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक दोनों ही दुनिया के सबसे बड़े मल्टी स्पोर्ट इवेंट्स में से हैं लेकिन इनमें भाग लेने वाले देशों, योग्यता, खेल और कुल ढांचे के मामले में काफी ज्यादा अंतर है. आइए जानते हैं इन दो ग्लोबल स्पोर्ट्स इवेंट्स में क्या अंतर है.

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कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक अलग-अलग सिद्धांतों पर आधारित 

दोनों इवेंट्स के बीच सबसे बड़ा अंतर इस बात में है कि इनमें कौन भाग ले सकता है. ओलंपिक गेम्स एक ग्लोबल स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन है जिसमें इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्वतंत्र देश भाग ले सकते हैं. दुनिया के लगभग हर कोने से एथलीट एक ही इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर मुकाबला करते हैं. 

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वहीं दूसरी तरफ कॉमनवेल्थ गेम्स सिर्फ कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्यों तक ही सीमित हैं. इनमें से ज्यादातर देश पहले ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे और कॉमनवेल्थ के जरिए ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंध बनाए हुए हैं.

कितने देश भाग लेते हैं? 

भाग लेने वाले देशों की संख्या में भी काफी ज्यादा अंतर है. ओलंपिक गेम्स में लगभग 206 नेशनल ओलंपिक कमेटियां शामिल होती हैं जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट में से एक बन जाता है. कॉमनवेल्थ गेम्स में 74 टीमें शामिल होती हैं. हालांकि कॉमनवेल्थ में 56 सदस्य देश हैं लेकिन कई ब्रिटिश ओवरसीज टेरिटरीज, क्राउन डिपेंडेंसी और छोटे द्वीपों को अलग से मुकाबला करने की अनुमति है. इससे भाग लेने वाली टीमों की कुल संख्या बढ़ जाती है. 

जैसे यूनाइटेड किंगडम ओलंपिक में ग्रेट ब्रिटेन के तौर पर मुकाबला करता है वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्थन आयरलैंड अलग-अलग टीमों के तौर पर भाग लेते हैं. बरमूडा, जर्सी, ग्वेर्नसे, केमैन आइलैंड्स और फॉकलैंड आइलैंड्स जैसे क्षेत्र भी अपनी स्वतंत्र टीम भेजते हैं.

पैरा स्पोर्ट्स के लिए अलग नजरिया 

दिव्यांग एथलीट के लिए कॉम्पिटीशन आयोजित करने का तरीका दोनों इवेंट्स में काफी अलग-अलग है. ओलंपिक और पैरालंपिक अलग-अलग इवेंट्स के तौर पर आयोजित किए जाते हैं. ओलंपिक खत्म होने के कुछ ही हफ्तों बाद उसी होस्ट शहर में पैरालंपिक गेम्स आयोजित किए जाते हैं.  लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स एक इंटीग्रेटेड मॉडल अपनाते हैं. इसमें पैरा एथलीट और सामान्य एथलीट एक ही इवेंट के दौरान मुकाबला करते हैं. वे एक ही एथलीट विलेज में रहते हैं और पैरा एथलीटों द्वारा जीते गए मेडल सीधे देश की कुल मेडल टैली में जोड़े जाते हैं.

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खेल और इवेंट का दायरा

एथलीटों, खेलों और अवधि के मामलों में ओलंपिक काफी बड़े होते हैं. ओलंपिक खेल आमतौर पर 16 से 17 दिनों तक चलते हैं, जिनमें 10,500 से ज्यादा एथलीट 30 से ज्यादा खेलों और सैकड़ों मेडल इवेंट्स में हिस्सा लेते हैं. एथलेटिक्स, तैराकी, फुटबॉल, बास्केटबॉल, जिमनास्टिक और साइकलिंग जैसे खेल दुनिया भर का ध्यान खींचते हैं. वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स तुलनात्मक रूप से छोटे होते हैं और आमतौर पर 10 से 11 दिनों तक ही चलते हैं. खेल और एथलीटों की संख्या मेजबान शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लानिंग पर निर्भर करती है. 

कुछ खेल सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स में ही क्यों होते हैं? 

कॉमनवेल्थ गेम्स की एक खास बात यह है कि इसमें उन खेलों पर ध्यान दिया जाता है जो पारंपरिक रूप से कॉमनवेल्थ देशों में मशहूर हैं. क्रिकेट, नेटबॉल, लॉन बॉल्स और स्क्वैश जैसे खेलों को नियमित रूप से शामिल किया जाता है. इनमें से कई खेल या तो ओलंपिक में शामिल नहीं होते या फिर सीमित फॉर्मेट में ही खेले जाते हैं.

कौन सा इवेंट बड़ा है? 

वैश्विक भागीदारी, टेलीविजन दर्शकों, खेल की संख्या, एथलीट और कुल पैमाने के लिहाज से ओलंपिक खेल दुनिया का सबसे बड़ा मल्टी स्पोर्ट इवेंट बना हुआ है. कॉमनवेल्थ गेम्स छोटे होते हैं लेकिन कॉमनवेल्थ देशों के लिए इनका काफी बड़ा महत्व है. ये एथलीट को एक और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच देते हैं और साथ ही उन खेलों को ज्यादा अहमियत देते हैं जिन्हें ओलंपिक में शायद काफी कम ध्यान मिलता हो.

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