अपना खुद का आशियाना या घर बनाना हर इंसान के जीवन का एक सबसे बड़ा सपना होता है. जब भी कोई व्यक्ति नया घर बनाने की योजना तैयार करता है, तो उसके दिमाग में सबसे पहला और सबसे पहले सवाल यही आता है कि मकान को सबसे ज्यादा मजबूत कैसे बनाया जाए. आज के समय में घर बनाने के लिए मुख्य रूप से दो तकनीकों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली है परंपरागत लोड-बेयरिंग तकनीक, जिसे आम भाषा में नॉर्मल मकान कहा जाता है, और दूसरी है आधुनिक कॉलम और बीम तकनीक.

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क्या होता है नॉर्मल मकान?

परंपरागत या नॉर्मल मकान बनाने की तकनीक में पूरे घर का भार दीवारों पर टिका होता है. इसमें सबसे पहले जमीन के नीचे मजबूत नींव खोदी जाती है और फिर सीधे ईंटों या पत्थरों की मोटी दीवारें खड़ी कर दी जाती हैं. इस तकनीक में कंक्रीट के खंभों का इस्तेमाल नहीं होता. छत का पूरा वजन सीधे दीवारों पर आता है और दीवारें उस वजन को नीचे जमीन तक पहुंचाती हैं.

इंजीनियरों के मुताबिक, यह तकनीक केवल एक या दो मंजिला छोटे घरों के लिए ही उपयुक्त मानी जाती है. नॉर्मल मकान बनाने में शुरुआती खर्च काफी कम आता है क्योंकि इसमें स्टील और सीमेंट की खपत कॉलम वाले मकानों के मुकाबले बेहद कम होती है.

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क्या है कॉलम और बीम तकनीक?

आधुनिक निर्माण में कॉलम और बीम तकनीक को सबसे ज्यादा सुरक्षित और मजबूत माना जाता है. इस तकनीक में घर का पूरा ढांचा कंक्रीट और लोहे के मजबूत खंभों और बीम पर तैयार किया जाता है. इसमें छत का वजन पहले बीम पर, फिर बीम से कॉलम पर और कॉलम के जरिए सीधे जमीन के गहरे बेस तक ट्रांसफर होता है.

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दीवारों पर इमारत का कोई लोड नहीं होता. दीवारें केवल कमरों को अलग करने और पर्दा करने का काम करती हैं. यही वजह है कि आज बनने वाली सभी बहुमंजिला इमारतें और गगनचुंबी अपार्टमेंट्स इसी तकनीक पर बनाए जाते हैं.

मजबूती के मामले में कौन है असली किंग?

यदि सीधे तौर पर मजबूती, टिकाऊपन और सुरक्षा की तुलना की जाए, तो कॉलम आधारित मकान नॉर्मल मकानों की तुलना में कई गुना ज्यादा ताकतवर होते हैं. भूकंप, तेज आंधी या किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय कॉलम और बीम से बना फ्रेम स्ट्रक्चर एक लचीलापन प्रदान करता है, जिससे इमारत के ढहने का खतरा न के बराबर हो जाता है.

दूसरी तरफ, नॉर्मल मकानों में भूकंप के झटके लगने पर दीवारों में दरारें आने और पूरी छत के ढहने की आशंका काफी ज्यादा रहती है. कॉलम वाले मकान की लाइफ भी सामान्य मकान से बहुत ज्यादा होती है, और भविष्य में ऊपरी मंजिलें बनाने के लिए यह तकनीक सबसे सुरक्षित रास्ता देती है.

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भविष्य में बदलाव और डिजाइन की आजादी

कॉलम आधारित कंस्ट्रक्शन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह आपको मकान के नक्शे में कभी भी बदलाव करने की पूरी आजादी देता है. चूंकि दीवारें किसी भी तरह का वजन नहीं उठाती हैं, इसलिए आप भविष्य में अपनी जरूरत के हिसाब से किसी भी दीवार को तोड़कर कमरे को बड़ा कर सकते हैं या हॉल बना सकते हैं.

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