Night Of Doom: आस्था, इतिहास और राजनीति पर होने वाली बहसों में अक्सर कयामत की रात का भी जिक्र होता है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कयामत कभी भी नहीं आएगी और बाबरी मस्जिद का दोबारा से निर्माण नहीं होगा. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर किस रात को कयामत की रात माना जाता है और कब तक आ सकती है यह रात.

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कयामत की रात क्या है 

इस्लामी मान्यता के मुताबिक कयामत का सही समय पूरी तरह से नहीं पता है. इस्लामी शिक्षा में कयामत की रात को कैलेंडर पर किसी खास रात के रूप में नहीं बताया गया है. हालांकि कई हदीसों में जिक्र है की आखिरी घड़ी शुक्रवार को आएगी. ऐसा माना जाता है कि दुनिया में काफी बड़ा बदलाव आएगा. दुनिया का पूरा सिस्टम खत्म हो जाएगा और कुदरत के नियम ठीक से काम करना बंद कर देंगे. ऐसा कहा जाता है कि वह घड़ी अचानक आएगी. वह लोगों को तब पकड़ लेगी जब वे रोजमर्रा की जिंदगी में लगे होंगे और उन्हें नहीं पता होगा कि आगे क्या होने वाला है.

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कैसा होगा वह दिन 

इस्लामी धर्मग्रंथों में एक काफी नाटकीय और खतरनाक मंजर बताया गया है. सूरज और चांद अपनी रोशनी खो देंगे, पहाड़ हुई की तरह टूट कर बिखर जाएंगे, समुद्र उबलने लगेंगे और आसमान फट जाएगा. इस जवाबदेही के दिन के तौर पर दिखाया गया है जहां हर इंसान अपने कामों का हिसाब देगा.

कयामत का दिन कब आ सकता है 

इसका सही समय अभी भी एक राज है. हालांकि इस्लामी शिक्षाएं उन निशानियों के बारे में बताती हैं जो इसके आने से पहले दिखाई देंगी. इन्हें छोटी और बड़ी निशानियों में बांटा गया है.

छोटी निशानियां 

ऐसा कहा जाता है कि कई छोटी निशानियां पहले ही दिखाई दे चुकी हैं या आज भी दिखाई देती हैं. इनमें बड़े पैमाने पर नैतिक गिरावट,  शराब पीना आम बात हो जाना, धार्मिक ज्ञान में कमी और अज्ञानता में बढ़ोतरी शामिल है. एक और बताई जाने वाली निशानी ऊंची इमारतें बनाने की होड़ है. 

बड़े संकेत

बड़ी निशानियां काफी ज्यादा असाधारण और साफ घटनाएं मानी जाती हैं. इनमें दज्जाल का दिखना,  हजरत ईसा का वापस आना, पश्चिम से सूरज का उगना और  याजूज और माजूज का निकलना शामिल है. दूसरे संकेत में दाब्बतुल अर्ज का निकलना शामिल है. इसी के साथ पूरी दुनिया पर धुंआ छा जाता है और तीन बड़े लैंडस्लाइड होते हैं. 

इस्लामी मान्यता के मुताबिक अंत तब शुरू होगा जब फरिश्ता हजरत इस्राफील पहला सूर फूंकेंगे. इससे दुनिया खत्म हो जाएगी. इसके 40 साल बाद दूसरा सूर फूंका जाएगा. यह कयामत के समय की शुरुआत से पूरी इंसानियत को फिर से जिंदा करेगा.

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