आज से 100 साल बाद यानी साल 2125 में धरती कैसी दिखेगी, इसे लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं. जलवायु परिवर्तन पर हुए कई बड़े अध्ययनों में जो तस्वीर सामने आई है, वह डराने वाली है. तापमान में तेजी से बढ़ोतरी, समुद्र का बढ़ता जलस्तर, डूबते शहर और गायब होते जीव-जंतु, ये कुछ ऐसे संकेत हैं जिन्हें लेकर वैज्ञानिक बार-बार चेतावनी दे रहे हैं. आइए जानते हैं कि आने वाले 100 सालों में धरती को लेकर वैज्ञानिकों की क्या राय है.

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तापमान में कितना होगा इजाफा?

जलवायु परिवर्तन पर बनी संयुक्त राष्ट्र की संस्था IPCC की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी रफ्तार से जारी रहा, तो साल 2100 तक धरती का औसत तापमान करीब 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. कुछ मॉडल तो यह भी बता रहे हैं कि हालात न सुधरे तो यह बढ़ोतरी 5 डिग्री सेल्सियस तक भी जा सकती है. यह इजाफा पिछले हजारों सालों में हुए किसी भी प्राकृतिक बदलाव से कहीं ज्यादा तेज माना जा रहा है.

समुद्र का जलस्तर 

तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और बर्फ की चट्टानें तेजी से पिघल रही हैं, जिससे समुद्र का जलस्तर लगातार ऊपर उट रहा है. रिसर्च संस्था क्लामेट सेंट्रल के मुताबिक, अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो लंदन, न्यूयॉर्क और बैंकाक जैसे कई बड़े शहरों के निचले इलाके अगली सदी तक पानी में डूब सकते हैं. एशिया के तटीय इलाकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है, जहां करोड़ों लोग समुद्र किनारे रहते हैं.

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मौसम में आएंगे बड़े बदलाव

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले सालों में हीटवेव यानी लू ज्यादा बार और लंबे समय तक चलेगी. इससे सूखा पड़ने की घटनाएं बढ़ेंगी और कई इलाकों में पानी की भारी कमी हो सकती है. वहीं कुछ हिस्सों में बहुत तेज बारिश और बाढ़ जैसी घटनाएं भी आम हो सकती हैं. यानी मौसम का मिजाज पहले से कहीं ज्यादा असंतुलित हो जाएगा. 

जीव-जंतुओं और पर्यावरण पर असर

तापमान और मौसम में हो रहे बदलावों का सीधा असर धरती पर मौजूद जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर भी पड़ेगा. कई रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो धरती पर मौजूद करीब एक चौथाई पशु-पक्षी और वनस्पतियां विलुप्त होने के खतरे में आ सकती हैं. 

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क्या इंसानों का भविष्य भी खतरे में?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले 100 सालों में धरती इंसानों के रहने लायक तो बनी रहेगी, लेकिन हालात पहले जैसे आसान नहीं होगें. खाने-पीने के चीजों की कमी, पानी का संकट, बिमारियों का फैलाव और बड़े पैमाने पर लोगों के पलायन, ये सभी चुनौतियां आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं. हालांकि वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि अगर दुनिया के देश मिलकर कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण बचाने के ठोस कदम उठाएं, तो इनमें से कई खतरों को कम जरूर किया जा सकता है.

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