Kerala Name Change: भारत का राज्य कैसे बना था केरल, कहां गायब हो गया त्रावणकोर?
Kerala Name Change: केरल का नाम बदलकर केरलम कर दिया गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर केरल भारत का राज्य कैसे बना था.

Kerala Name Change: दक्षिण भारत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल यूनियन कैबिनेट ने केरल का नाम ऑफीशियली बदल कर 'केरलम' करने के लंबे समय से रुके हुए प्रपोजल को मंजूरी दे दी है. इस डेवलपमेंट के बीच कई लोग राज्य के ऐतिहासिक सफर पर फिर से सोच रहे हैं. आइए जानते हैं कि केरल भारत का हिस्सा कैसे बना था और त्रावणकोर रियासत का क्या हुआ.
1949 में त्रावणकोर और कोचीन का यूनियन
1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद सबसे बड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव चुनौतियों में से एक सैकड़ों रियासतों को इंडियन यूनियन में मिलाना था. सरदार वल्लभभाई पटेल के लीडरशिप में ज्यादातर रियासतों को भारत में मर्ज करने के लिए मना लिया गया था. 1 जुलाई 1949 को त्रावणकोर और कोचीन की रियासतों को मिलाकर एक नई एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट बनाई गई. इसे त्रावणकोर कोचीन कहा जाता है. इसे थिरु-कोच्चि के नाम से भी जाना जाता है. त्रावणकोर के महाराजा चिथिरा थिरूनल बलराम वर्मा नए बने राज्य के राजप्रमुख बने. त्रावणकोर कहीं गायब नहीं हुआ बल्कि एक आजाद रियासत के तौर पर उसका वजूद खत्म हो गया.
ऐक्य केरल मूवमेंट
आजादी के बाद के शुरुआती सालों में मजबूत पब्लिक मूवमेंट ने मांग की कि भारतीय राज्यों को पुरानी रियासतों की सीमाओं के बजाय भाषा के आधार पर दुबारा से गठित किया जाए. केरल के मामले में ऐक्य केरल मूवमेंट ने सभी मलयालम बोलने वाले इलाकों को एक राज्य में मिलाने पर जोर दिया. इस मांग को 1956 में लागू हुए स्टेट्स रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के जरिए पूरा किया गया. 1 नवंबर 1956 को मॉडर्न केरल राज्य ऑफीशियली बना.
इस पुनर्गठन के तहत पहले की मद्रास प्रेसीडेंसी के मालाबार जिले और साउथ कनारा के कासरगोड तालुक को त्रावणकोर-कोचीन में मिला दिया गया. उसी समय दक्षिणी त्रावणकोर के तमिल बोलने वाले इलाके, जैसे कि कन्याकुमारी और शेनकोट्टई तब के मद्रास राज्य में ट्रांसफर कर दिए गए. जिसे अब तमिलनाडु के नाम से जाना जाता है.
राजप्रमुख का पद हुआ खत्म
1956 में केरल बनने के साथ राजप्रमुख का पुराना पद खत्म कर दिया गया. राज्य ने पूरे भारत में अपनाए जाने वाले स्टैंडर्ड कांस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर के तहत काम करना शुरू कर दिया था. इसमें गवर्नर को कांस्टीट्यूशनल हेड और एक चुनी हुई लेजिसलेटिव असेंबली के तौर पर अप्वॉइंट किया गया. इस तरह त्रावणकोर की शाही एडमिनिस्ट्रेटिव पहचान धीरे-धीरे रिपब्लिक ऑफ इंडिया के डेमोक्रेटिक फ्रेमवर्क में मिल गई.
त्रावणकोर कहां गया?
त्रावणकोर कहीं गायब नहीं हुआ बल्कि यह इवॉल्व हुआ. इसका इलाका मॉडर्न केरल का एक हिस्सा बन गया. इसने राज्य की कल्चरल, एजुकेशनल और पॉलिटिकल विरासत में बड़ा योगदान दिया. इसका हिस्टोरिकल असर केरल के इंस्टीट्यूशन और समाज में गहराई से जुड़ा हुआ है.
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Source: IOCL

























