Census 2027 Live In Couples: भारत की अगली जनगणना न केवल आबादी के आंकड़े जुटाएगी, बल्कि बदलते समाज की एक नई तस्वीर भी पेश करेगी. 1 अप्रैल से शुरू हो रही इस जनगणना के लिए सरकार ने एक बड़ा और आधुनिक फैसला लिया है, जो सीधे तौर पर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों से जुड़ा है. अब तक शादीशुदा जोड़ों और कुंवारे लोगों के बीच जो एक धुंधली रेखा थी, उसे जनगणना के नियमों ने स्पष्ट कर दिया है. डिजिटल पोर्टल और आसान सवालों के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आधुनिक भारत के घरों के भीतर रिश्तों का स्वरूप कैसा है. चलिए विस्तार से समझें.

Continues below advertisement

लिव-इन जोड़ों के लिए जनगणना के नए नियम

2027 की भारतीय जनगणना में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जो लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स से संबंधित है. सरकार ने साफ किया है कि जो जोड़े बिना शादी के एक साथ रह रहे हैं और अपने रिश्ते को स्थाई या स्थिर मानते हैं, उन्हें जनगणना के दौरान शादीशुदा जोड़ों के रूप में ही दर्ज किया जाएगा. यह फैसला समाज के बदलते स्वरूप को स्वीकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. जनगणना के आधिकारिक पोर्टल पर जारी किए गए नियमों (FAQ) में इस बात की पुष्टि की गई है कि ऐसे जोड़ों को अलग से किसी श्रेणी में रखने के बजाय विवाहित जोड़ों की लिस्ट में ही शामिल किया जाएगा.

Continues below advertisement

जानकारी दर्ज करने के लिए क्या क्या चाहिए?

जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी को ही अंतिम और सही माना जाता है. अगर कोई जोड़ा खुद को लिव-इन में बताते हुए शादीशुदा जोड़ों की श्रेणी में दर्ज कराना चाहता है, तो उसे इसके लिए किसी भी तरह के कानूनी दस्तावेज, मैरिज सर्टिफिकेट या पहचान पत्र दिखाने की जरूरत नहीं होगी. जनगणना अधिकारी आपसे कोई सबूत नहीं मांगेंगे. जो जानकारी आप खुद पोर्टल पर भरेंगे या घर आने वाले कर्मचारी को देंगे, उसे ही रिकॉर्ड का हिस्सा बना लिया जाएगा. यह प्रक्रिया पूरी तरह से विश्वास और स्व-घोषणा पर आधारित है. 

यह भी पढ़ें: Ghost Accounts On Social Media: दुनिया में कितने हैं घोस्ट अकाउंट, आज से 50 साल बाद सोशल मीडिया पर कितनी होगी इनकी तादाद

कब से कब तक चलेगी जनगणना?

जनगणना की पूरी प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होकर 30 सितंबर के बीच संपन्न की जाएगी. हालांकि, अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी सुविधा के अनुसार तारीखें तय करने की आजादी दी गई है. इस पूरी प्रक्रिया को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है. पहले 15 दिनों के दौरान नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने का मौका मिलेगा. इसके बाद के 30 दिनों में गणना करने वाले कर्मचारी घर-घर जाकर उन लोगों का डेटा जुटाएंगे, जिन्होंने खुद अपनी जानकारी दर्ज नहीं की है.

ऑनलाइन पोर्टल और सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा

डिजिटल इंडिया के दौर में इस बार जनगणना के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है. इस पोर्टल का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाना है. नागरिक घर बैठे जनगणना के दोनों चरणों- हाउस लिस्टिंग (HLO) और जनसंख्या गणना की जानकारी भर सकेंगे. पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) की एक लंबी सूची दी गई है, ताकि लिव-इन जोड़ों या सामान्य परिवारों को फॉर्म भरते समय कोई भ्रम न रहे. सरकार का मानना है कि इस डिजिटल सुविधा से डेटा जुटाने में सटीकता आएगी और लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

लिव इन कपल्स से कौन से सवाल पूछे जाएंगे?

जनगणना के दौरान लिव इन कपल्स से भी शादीशुदा जोड़ों वाले ही सवाल पूछे जाएंगे, क्योंकि इनको शादीशुदा की श्रेणी में रखा जाएगा. घर-घर जाकर कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का मकसद केवल जनसंख्या गिनना नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के जीवन स्तर को समझना भी है. इसमें परिवार के पास मौजूद बुनियादी और आधुनिक सुविधाओं के बारे में पूछा जाएगा- जैसे-

  • आपके पास कौन-कौन से वाहन (साइकिल, स्कूटर या कार) हैं 
  • आप किस तरह के अनाज का सेवन करते हैं 
  • घर में रहने वाले कुल विवाहित जोड़ों की संख्या कितनी है
  • आपके घर की छत, दीवार और फर्श किस सामग्री (मिट्टी, कंक्रीट या ईंट) से बने हैं 
  • परिवार के मुखिया का लिंग 
  • परिवार के मुखिया का सामाजिक वर्ग (SC/ST या अन्य) 
  • घर के उपयोग की स्थिति के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी 

परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की कुल संख्या और घर की बुनियादी बनावट के आधार पर सरकार भविष्य की योजनाएं और नीतियां तैयार करेगी. इसी आधारपर 33 सवाल पूछे जाएंगे.

यह भी पढ़ें: Iran Israel Fertility Rate: ईरान या इजरायल...कहां की लड़कियां पैदा करती हैं ज्यादा बच्चे, जानें दोनों देशों का फर्टिलिटी रेट