Pakistan Internet System: बढ़ते तनाव और डिजिटल युद्ध के बढ़ने के बीच अक्सर यह चर्चा सामने आती रहती है कि क्या भारत पाकिस्तान की इंटरनेट प्रणाली को पूरी तरह से बंद कर सकता है. हालांकि भारत सीधे तौर पर पाकिस्तान के पूरे इंटरनेट नेटवर्क को बंद नहीं कर सकता क्योंकि वैश्विक इंटरनेट विकेंद्रीकृत है और किसी एक देश द्वारा कंट्रोल नहीं किया जाता. लेकिन पाकिस्तान के डिजिटल बुनियादी ढांचे में कई कमजोरियां हैं जो इसे संकट के दौरान व्यवधान के प्रति संवेदनशील बनाती हैं.
सबमरीन केबल्स पर निर्भरता
पाकिस्तान वैश्विक इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए मुख्य रूप से SEA-ME-WE-4, SEA-ME-WE 5 और IMEWE जैसी समुद्री केबलों पर निर्भर है. भारत के उलट जहां 15 से ज्यादा सबमरीन केबल कनेक्शन और कई अंतरराष्ट्रीय मार्ग हैं पाकिस्तान के पास सीमित विकल्प हैं. इन केबल में कोई भी खराबी इंटरनेट सेवा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. हाल ही में ऐसा लाल सागर केबल कटने और SEA-ME-WE 5 केबल में खराबी से जुड़े आउटेज के दौरान देखा गया था.
साइबर हमले जरूरी नेटवर्क को बाधित कर सकते हैं
साइबर युद्ध आधुनिक संघर्ष का एक काफी जरूरी हिस्सा बन गया है. ऑनलाइन सेवा को बाधित करने के लिए डिस्ट्रीब्युटेड डेनियल ऑफ सर्विस हमलों के जरिए से सरकारी सर्वर, टेलीकॉम गेटवे और दूसरे जरूरी बुनियादी ढांचे को लक्षित किया जा सकता है. इंटरनेट रूटिंग प्रोटोकोल में कोई भी हस्तक्षेप या फिर आईपी ट्रैफिक को रोकने से साइबर संघर्ष के दौरान डिजिटल संचार काफी ज्यादा प्रभावित हो सकता है.
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डिजिटल प्रतिबंध पहले से ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं
भारत पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर पाकिस्तान में स्थित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. भारत में पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल, वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया है. इसी के साथ कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर की वजह से 1400 से ज्यादा पाकिस्तानी यूआरएल और डिजिटल प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया गया है. इन पर भारत विरोधी प्रचार फैलाने का आरोप है.
पाकिस्तान क्यों चिंतित रहता है?
एक दूसरी वजह पाकिस्तान की बाहरी प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचे पर निर्भरता है. देश में एक मजबूत रूट सर्वर निर्देशिका और एक आजाद उपग्रह नेटवर्क का अभाव है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहायता प्रभावित होने पर इसका डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र काफी ज्यादा खतरे में आ जाता है. हालांकि भारत आसानी से पाकिस्तान का इंटरनेट बंद नहीं कर सकता लेकिन सीमित कनेक्टिविटी मार्ग, साइबर कमजोरी और बाहरी प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचे पर देश की निर्भरता बताती है कि भारत पाकिस्तान हाइब्रिड युद्ध के उभरते परिदृश्य में डिजिटल सुरक्षा एक बड़ी चिंता क्यों बन गई है.
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