Spy Satellite: बाहरी अंतरिक्ष में सक्रिय उपग्रहों के जरिए देश कानूनी रूप से दूसरे देशों की निगरानी कर सकते हैं. आधुनिक जासूसी सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट पृथ्वी की सतह की हाई रेजोल्यूशन तस्वीरों को कैप्चर करने के लिए एडवांस्ड कैमरे, रडार सिस्टम और सेंसर का इस्तेमाल करते हैं. ये सेटेलाइट्स सैन्य गतिविधि के निगरानी कर सकते हैं, बुनियादी ढांचे के विकास का निरीक्षण कर सकते हैं और पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर से भौगोलिक डेटा को इकट्ठा कर सकते हैं.

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हवाई क्षेत्र और आउटर स्पेस 

अंतरराष्ट्रीय कानून में सबसे जरूरी अंतरों में से एक हवाई क्षेत्र और बाहरी अंतरिक्ष के बीच का अंतर है.‌ किसी देश का हवाई क्षेत्र उसके संप्रभुत क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है और आमतौर पर समुद्र तल से लगभग 80 से 100 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला होता है. बिना अनुमति के इस क्षेत्र में आना विदेशी विमान, ड्रोन या फिर सैन्य‌ वाहन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है और घुसपैठ माना जाता है. साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन भी हो सकता है. हालांकि लगभग 100 किलोमीटर से ज्यादा का क्षेत्र जिसे आउटर स्पेस के रूप में जाना जाता है राष्ट्रीय संप्रभुता से बाहर आता है. इस सीमा को आमतौर पर कार्मन रेखा के रूप में जाना जाता है.

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1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी 

आधुनिक अंतरिक्ष कानून की नींव 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी है. इस संधि के मुताबिक आउटर स्पेस को वैश्विक सार्वजनिक क्षेत्र माना जाता है और यह सभी देशों द्वारा रिसर्च और इस्तेमाल के लिए खुला है. इस संधि के तहत कोई भी देश अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च कर सकता है. इसी के साथ सैटेलाइट पृथ्वी के किसी भी क्षेत्र की परिक्रमा कर सकते हैं और साथ ही आउटर स्पेस से दूसरे देश के क्षेत्र से गुजरना संप्रभुता का उल्लंघन नहीं है. 

रिमोट सेंसिंग पर संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांत 

1986 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आउटर स्पेस से पृथ्वी की रिमोट सेंसिंग से संबंधित सिद्धांतों को अपनाया. ये सिद्धांत मानते हैं कि देश अवलोकन किए जा रहे राष्ट्र से  पहले से मंजूरी लिए बिना अंतरिक्ष से‌ वैज्ञानिक डाटा इकट्ठा कर सकते हैं. साथ ही किसी दूसरे देश के क्षेत्र की उपग्रह तस्वीर खींचना आमतौर पर वैध माना जाता है.

आज रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट का इस्तेमाल न सिर्फ खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए बल्कि मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी, कृषि और शहरी नियोजन के लिए भी किया जाता है.

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