Assembly Elections 2026: क्या आम आदमी भी लड़ सकता है विधानसभा चुनाव, इसके लिए कितने रुपये लगते हैं?
Assembly Elections 2026: विधानसभा चुनाव लड़ना हर भारतीय नागरिक का अधिकार है, बशर्ते वह 25 साल का हो और वोटर लिस्ट में उसका नाम हो. आइए जानें किसी नागरिक को इसके लिए कितने रुपये खर्चा करने होते हैं.

- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, पुडुचेरी में चुनाव तिथियां घोषित कर दी हैं.
- विधानसभा चुनाव लड़ने हेतु 25 वर्ष आयु, मतदाता सूची में नाम, भारतीय नागरिकता अनिवार्य है.
- सामान्य वर्ग के लिए 10,000 व SC/ST के लिए 5,000 रुपये जमानत राशि जमा करनी होती है.
- उम्मीदवार प्रचार में बड़े राज्यों में 40 लाख, छोटे राज्यों में 28 लाख तक खर्च कर सकते हैं.
Assembly Elections 2026: चुनाव आयोग ने 15 मार्च 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखें सार्वजनिक कर दी हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इन क्षेत्रों में 824 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इस घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो गई है, जिससे अब सरकारों की नई योजनाओं की घोषणा पर रोक लग गई है. आइए इसी क्रम में यह जान लेते हैं कि क्या एक आम आदमी भी विधानसभा का चुनाव लड़ सकता है और इसके लिए कितना रुपया खर्चा होता है.
विधानसभा चुनाव लड़ने की बुनियादी शर्तें
विधानसभा चुनाव (MLA) लड़ने के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि आपकी उम्र कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए. इसके साथ ही उम्मीदवार का नाम भारत के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची (Voter List) में दर्ज होना अनिवार्य है. उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना और किसी लाभ के पद पर न होना भी जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति पागल घोषित किया गया है या किसी अदालत द्वारा सजायाफ्ता है (2 साल से अधिक की सजा), तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है.
कितने रुपये में भरी जाती है दावेदारी?
चुनाव लड़ने के लिए निर्वाचन आयोग के पास कुछ सिक्योरिटी जमा करनी होती है. सामान्य वर्ग (General Category) के उम्मीदवारों के लिए यह राशि 10,000 रुपये तय की गई है. वहीं, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों के लिए इसमें रियायत दी गई है, जिन्हें केवल 5,000 रुपये जमा करने होते हैं. यह पैसा नामांकन पत्र दाखिल करते समय ट्रेजरी चालान या नकद के रूप में जमा किया जा सकता है.
कब वापस मिलते हैं जमानत के रुपये?
'जमानत जब्त होना' मुहावरा आपने अक्सर सुना होगा. तकनीकी रूप से इसका मतलब है कि यदि कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का 1/6 हिस्सा यानी करीब 16.66% वोट पाने में नाकाम रहता है, तो उसके द्वारा जमा किए गए 10,000 (या 5,000) रुपये चुनाव आयोग द्वारा जब्त कर लिए जाते हैं. लेकिन अगर आप इससे अधिक वोट पाते हैं या चुनाव जीत जाते हैं, तो यह राशि आपको वापस लौटा दी जाती है.
चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा क्या है?
जमानत राशि तो महज कुछ हजार है, लेकिन चुनाव प्रचार पर होने वाले खर्च की अपनी एक सीमा है. निर्वाचन आयोग के मौजूदा नियमों के अनुसार, बड़े राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार) में एक उम्मीदवार विधानसभा चुनाव में अधिकतम 40 लाख रुपये तक खर्च कर सकता है. छोटे राज्यों (जैसे गोवा, मणिपुर) के लिए यह सीमा 28 लाख रुपये तय की गई है. उम्मीदवार को अपने हर एक रुपये के खर्च का हिसाब आयोग को देना होता है.
नामांकन के लिए जरूरी कागजात और प्रक्रिया
नामांकन के समय उम्मीदवार को एक हलफनामा (Affidavit) देना होता है, जिसे 'फॉर्म 26' कहा जाता है. इसमें उसे अपनी संपत्ति, देनदारियां, शैक्षिक योग्यता और अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों (यदि कोई हो) की पूरी जानकारी देनी होती है. यदि आप किसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्य स्तर की पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं, तो केवल एक प्रस्तावक की जरूरत होती है, लेकिन निर्दलीय लड़ने पर 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं.
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Source: IOCL



























