Expensive Homes: पूरी दुनिया में घर खरीदना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. लेकिन एक ऐसा देश भी है जहां पर एक ठीक-ठाक अपार्टमेंट खरीदने के लिए 8 करोड़ भी काफी नहीं हैं. मोनाको और हांगकांग अभी दुनिया के सबसे महंगे प्रॉपर्टी बाजारों में गिने जाते हैं. यहां आसमान छूती कीमतों ने आम लोगों के लिए घर खरीदना लगभग नामुमकिन बना दिया है. नाइट फ्रैंक और सैविल्स जैसी ग्लोबल रियल एस्टेट फर्मों की रिपोर्ट के मुताबिक मोनाको में 8 करोड़ में सिर्फ 16 वर्ग मीटर या फिर लगभग 172 वर्ग फीट जगह ही खरीदी जा सकती है. 

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मोनाको दुनिया का सबसे महंगा प्रॉपर्टी बाजार 

मोनाको को प्रॉपर्टी खरीदने के लिए दुनिया की सबसे महंगी जगह माना जाता है. यहां रियल एस्टेट की कीमतें $52000 से $100000 प्रति वर्ग मीटर के बीच हैं. अपने आलीशान रहन-सहन और टैक्स फ्री सिस्टम की वजह से यह देश अरबपतियों का पसंदीदा ठिकाना बन गया है. इन भारी कीमतों के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक है मोनाको का काफी सीमित जमीन का इलाका. यह देश दो वर्ग किलोमीटर से भी कम इलाके में फैला है.

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हांगकांग और सिंगापुर भी सबसे महंगे बाजारों में शामिल 

हांगकांग दुनिया के सबसे महंगे हाउसिंग बाजारों में से एक है. यहां प्रॉपर्टी की औसत कीमत लगभग $26100 प्रति वर्ग मीटर है. जानकारों का यह कहना है कि जमीन की सीमित उपलब्धता और ज्यादा आबादी की वजह से कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया गया है. सिंगापुर भी एशिया के सबसे महंगे प्रॉपर्टी डेस्टिनेशंस में से एक है. यहां प्रॉपर्टी की दरें $22000 से $23400 प्रति वर्ग मीटर के बीच हैं. 

स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया में बढ़ती मांग 

स्विट्जरलैंड भी सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में से एक है. यहां कीमत 17000 डॉलर से 18000 डॉलर प्रति वर्ग मीटर के बीच है. यह देश अपने उच्च जीवन स्तर और आलीशान हाउसिंग मार्केट के लिए जाना जाता है. वहीं दक्षिण कोरिया में प्रॉपर्टी की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. खासकर सियोल में. यहां घरों की औसत कीमत $13000 से $14000 प्रति वर्ग मीटर के बीच है. 

प्रॉपर्टी की कीमत इतनी ज्यादा क्यों? 

ऐसा कहा जा रहा है कि इन बढ़ती कीमतों के पीछे कई वजह हैं. मोनाको में जमीन की भारी कमी सबसे बड़ी वजह है. इसी के साथ इनकम टैक्स का ना होना दुनिया भर के अमीर लोगों को अपनी तरफ खींचता है. हांगकांग और सिंगापुर जैसे शहर भी निवेश और व्यापार के बड़े वैश्विक केंद्र बन चुके हैं.

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