देश के बंटवारे से जुड़ा है बटर चिकन का स्वाद, कोर्ट तक पहुंचा था रेसिपी विवाद, जानें इसका इतिहास
भारत की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डिश बटर चिकन को लेकर दो परिवार दावा करते हैं कि इस डिश का आविष्कार उनके पूर्वजों ने किया था. यह विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला कोर्ट तक पहुंच गया.

भारतीय अदालतों में आमतौर पर क्राइम, संपत्ति या कानूनी विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन जब कोई विवाद किसी फेमस डिश की विरासत से जुड़ा हो तो मामला रोचक हो जाता है. यह विवाद है भारतीय जुबान में रच-बस चुके 'बटर चिकन' के इतिहास का. आमतौर पर दो परिवारों के बीच संपत्ति का मामला कोर्ट पहुंचता है, लेकिन यहां हम जो किस्सा सुनाने जा रहे हैं, वह इसी बटर चिकन की विरासत का है, जिसको लेकर दो परिवार अदालत पहुंच गए.
दरअसल, भारत की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डिश बटर चिकन को लेकर दो परिवार दावा करते हैं कि इस डिश का आविष्कार उनके पूर्वजों ने किया था. ऐसे में यही बटर चिकन आज दो परिवारों में कानूनी लड़ाई की बड़ी वजह बन गया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बटर चिकन रेसिपी का विवाद कोर्ट तक कैसे पहुंच गया और बटर चिकन का स्वाद देश के बंटवारे से किस तरह से जुड़ा हुआ है.
कैसे बनता है बटर चिकन?
5 से 6 लोगों के लिए बटर चिकन बनाने में लगभग 1 किलो चिकन, टमाटर, मक्खन, दही, सरसों का तेल, हरी मिर्च, इलायची, लौंग, दालचीनी, जावित्री, कसूरी मेथी, गरम मसाला, लाल मिर्च, नींबू का रस, नमक और अदरक-लहसुन का पेस्ट इस्तेमाल होता है. इसे बनाने के लिए चिकन को मसाले के साथ अच्छी तरह मैरीनेट कर तंदूर या माइक्रोवेव में भून लिया जाता है. फिर मक्खन और तेल में खड़े मसाले फ्राई कर टमाटर, अदरक, लहसुन और बारीक मसाले पकाए जाते हैं. लास्ट में इसमें रोस्ट किया चिकन डालकर 15 मिनट तक पकाया जाता है और ऊपर से इलायची व क्रीम मिलाकर सर्व किया जाता है.
किस वजह से शुरू हुआ यह विवाद?
दिल्ली के दो मशहूर रेस्टोरेंट चेन मोती महल और दरियागंज इस रेसिपी के असली आविष्कारक को लेकर एक दूसरे के खिलाफ दावे कर रहे हैं. मोती महल का कहना है कि 1930 के दशक में कुंदनलाल गुजराल ने बटर चिकन डिश का आविष्कार किया था. वहीं दरियागंज का दावा है कि बटर चिकन के असली जनक उसके संस्थापक कुंदनलाल जग्गी थे. 2023 में शार्क टैंक इंडिया के एक एपिसोड में दरियागंज के मालिक की ओर से किए गए दावे के बाद मोती महल ने उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिसके बाद यह विवाद खुले तौर पर सामने आया था.
मोती महल का क्या है कहना?
मोती महल परिवार का कहना है कि जब भारत का बंटवारा नहीं हुआ था तो पेशावर के गोरा बाजार में मोखा सिंह लांबा का ढाबा था, जहां कुंदन गुजराल शेफ थे. यहीं पर उन्होंने पहली बार तंदूरी चिकन को टमाटर, मक्खन और मलाई की ग्रेवी में पकाकर बटर चिकन तैयार किया था. आजादी के बाद जब गुजराल दिल्ली आए तो उन्होंने यहां मोती महल खोला और इस डिश को लोकप्रिय बनाया. उनका यह भी कहना है कि कुंदन लाल जग्गी सिर्फ रेस्टोरेंट में उनके पार्टनर थे.
दरियागंज क्या करता है दवा?
वहीं दरियागंज के अनुसार, पेशावर के इस ढाबे में गुजराल नहीं बल्कि जग्गी ने बटर चिकन की रेसिपी बनाई थी. उनका कहना है कि मोती महल में भी बटर चिकन जग्गी ही बनाते थे और गुजराल मार्केटिंग देखते थे. इसी वजह से वह इसे अपनी पारिवारिक विरासत बताते हैं.
कहां से आया बटर चिकन, क्या कहता है इतिहास?
इतिहासकारों के अनुसार, बटर चिकन की उत्पत्ति 1930 के दशक में पेशावर में हुई थी, जहां इसे मुर्गी मखनी कहा जाता था. तंदूरी चिकन बनाते समय बचा हुआ चिकन एक दिन किसी शेफ ने टमाटर, मक्खन की ग्रेवी में डाल दिया जिसके बाद इसका स्वाद इतना पसंद आया कि अगले दिन से इसे मेन्यू में जोड़ दिया गया और यह फेमस हो गया. देश के बंटवारे के बाद मुर्गी मखनी धीरे-धीरे बटर चिकन नाम से मशहूर हो गई और आज भारत व पाकिस्तान दोनों देशों में सबसे पसंद की जाने वाली डिश बन चुकी हैं. हालांकि, बटर चिकन का असली मालिक कौन है यह मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है.
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Source: IOCL
























