Liquor Made From Volcanic: भारत सहित दुनिया भर के कई लोग शराब के शौकीन है. वहीं दुनिया में शराब की कई किस्में मशहूर हैं, लेकिन कुछ ड्रिंक ऐसी भी है जिनकी पहचान सिर्फ उनके स्वाद से नहीं, बल्कि उनकी अनोखी कहानी और बनाने के तरीके से होती है. ऐसी ही एक शराब व्हिस्की बशमिल्स है, जिसे दुनिया की सबसे पुरानी लाइसेंस वाली व्हिस्की माना जाता है. खास बात यह है कि इसकी डिस्टिलरी 400 साल से भी ज्यादा समय से लगातार काम कर रही है. इस व्हिस्की की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला पानी ज्वालामुखीय चट्टानों से होकर गुजरता है, जो इसके स्वाद और टेक्सचर को अलग बनाता है.
400 साल से ज्यादा पुराना है इतिहास
बशमिल्स की कहानी उत्तरी आयरलैंड के एंट्रिम काउंटी में बसे छोटे से कस्बे बशमिल्स से शुरू होती है. हालांकि इस इलाके में शराब बनाने की परंपरा इससे कई सदियों पुरानी मानी जाती है. रिकॉर्ड के अनुसार 20 अप्रैल 1608 को इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम ने इस क्षेत्र के जमींदार सर थॉमस फिलिप्स को शराब बनाने का शाही लाइसेंस दिया था. इसी वजह से 1608 को बशमिल्स की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है और यह तारीख आज भी इसकी हर बोतल पर लिखी होती है.
बशमिल्स कैसे बना दुनिया का सबसे पुराना व्हिस्की ब्रांड?
18वीं सदी के आखिर में 1784 में ओल्ड बशमिल्स डिस्टलरी को आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड किया गया. इसके बाद यह ब्रांड लगातार बढ़ता गया. वहीं 19वीं सदी में जब कई आयरिश डिस्टिलरियो ने टैक्स बचाने के लिए सस्ते अनाजों का इस्तेमाल शुरू कर दिया, तब भी बशमिल्स ने केवल माल्टेड जौ जैसे व्हिस्की बनाना जारी रखा है, वहीं यही इसकी सबसे बड़ी पहचान बन गई.
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ज्वालामुखी की चट्टानों से आता है इसका खास पानी
बशमिल्स व्हिस्की का पानी बश नदी से लिया जाता है. यह नदी बेसाल्ट की ज्वालामुखीय चट्टानों के ऊपर से बहती है. इन चट्टानों से गुजरने के कारण पानी में खास तरह का खनिज संतुलन विकसित होता है, जो व्हिस्की के स्वाद में भी महसूस किया जाता है. यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे स्मूथ व्हिस्की में से एक माना जाता है.
कैसे तैयार होती है बशमिल्स व्हिस्की?
बशमिल्स व्हिस्की पूरी तरह माल्टेड जौ से बनाई जाती है. इसकी उत्पादन प्रक्रिया के दौरान जौ को फर्मेंट किया जाता है और फिर पारंपरिक कॉपर पॉट स्टिल में तीन बार डिस्टिल किया जाता है. यह इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है, क्योंकि दुनिया की ज्यादातर स्कॉच व्हिस्की केवल दो बार डिस्टिल की जाती है. वहीं तीसरी डिस्टिलेशन प्रक्रिया व्हिस्की को ज्यादा स्मूथ और संतुलित स्वाद देती है. उसके बाद तैयार स्पिरिट को अलग अलग प्रकार के बैरल में कई वर्षों तक रखा जाता है. बैरल में जितना ज्यादा समय बीतता है, व्हिस्की का रंग उतना गहरा और स्वाद उतना खास होता जाता है.
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