Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया. इस बजट में स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे जरूरी घोषणाओं में से एक बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत ₹10,000 करोड़ का आवंटन किया गया. इसका मकसद भारत को बायोलॉजिकल दवाओं का ग्लोबल हब बनाना है. लेकिन यह बायोलॉजिक दवाएं क्या होती हैं. आइए जानते हैं कि यह नॉर्मल दवाओं से कितनी अलग हैं.

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बायोलॉजिकल दवाएं क्या हैं 

यह दवाएं केमिकल कंपाउंड के बजाय जीवित कोशिकाओं से बनी एडवांस्ड दवाएं हैं. इन जीवित सिस्टम में बैक्टीरिया, यीस्ट, या इंसान और जानवरों की कोशिकाएं शामिल हो सकती हैं. क्योंकि ये खुद जीवन से बनती हैं इस वजह से बायोलॉजिक्स इंसान के शरीर में प्राकृतिक प्रक्रियाओं की नकल करती हैं.

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बायोलॉजी दवाओं के आम उदाहरण में वैक्सीन, इंसुलिन, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, जीन थेरेपी और कैंसर के एडवांस्ड इलाज शामिल हैं. ये दवाएं खास तौर पर जटिल और पुरानी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं.

बनावट में अंतर 

बायोलॉजिक और आम दवाओं के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके सोर्स में होता है. ट्रेडिशनल या फिर नॉर्मल दवाई जैसे कि पेरासिटामोल या एस्पिरिन लैब में तय फॉर्मूलों के जरिए केमिकल के साथ मिलाकर बनाई जाती हैं. दूसरी तरफ बायोलॉजिक दवाएं जीवित जीवों के अंदर उगाई जाती हैं. केमिकल रूप से जोड़ने के बजाय उन्हें पूरी तरह से उगाया जाता है.

इसी के साथ आम दवाओं को छोटे मॉलिक्यूल वाली दवा कहा जाता है. उनकी संरचना काफी ज्यादा आसान, अनुमानित और कॉपी करने में भी आसान होती है. बायोलॉजिक्स काफी ज्यादा जटिल होते हैं. उनकी मॉलिक्युलर संरचना सैकड़ों गुना बड़ी और काफी ज्यादा जटिल होती है. 

क्या होती है बनाने की प्रक्रिया 

केमिकल दवा लगातार और बड़ी मात्रा में बनाई जा सकती है. यही वजह है कि जेनेरिक वर्जन आसानी से उपलब्ध होते हैं. वहीं अगर बायोलॉजिक दवाओं की बात करें तो इन्हें काफी ज्यादा नियंत्रित माहौल की जरूरत होती है. उत्पादन के दौरान तापमान, रोशनी या फिर नमी में थोड़ा सा भी बदलाव दवा के असर को बदल सकता है.  यह संवेदनशीलता बायोलॉजिक्स को बनाना और क्वालिटी चेक करना मुश्किल बनती है.

इलाज के फायदे 

बायोलॉजिक दवाएं टारगेटेड इलाज देती हैं. इसका मतलब है कि वे बीमारी के लिए जिम्मेदार खास सेल्स या फिर प्रोटीन पर काम करती हैं. यह उन्हें कैंसर, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, रूमेटाइड अर्थराइटिस, डायबिटीज और दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों के लिए खास तौर पर असरदार बनाता है.

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