Budget 2026: हर साल बजट वाले दिन एक तस्वीर देशभर में सबसे ज्यादा देखी जाती रही है संसद की सीढ़ियों पर खड़े वित्त मंत्री और उनके हाथ में एक खास लाल रंग का ब्रीफकेस. कैमरों की चमक, गंभीर चेहरे और एक रंग, जो सालों तक बजट की पहचान बन गया है. सवाल यही है कि आखिर बजट के साथ लाल रंग का रिश्ता कहां से जुड़ा? क्या ये सिर्फ एक परंपरा थी या इसके पीछे सत्ता, इतिहास और सोच की कोई गहरी कहानी छुपी है? हमेशा की तरह इस साल भी 1 फरवरी को बजट पेश होना है, लेकिन इस बार दिन संडे है. इसी क्रम में आइए इस लाल बैग के पीछे की कहानी जानें.

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बजट और लाल रंग का रिश्ता कहां से शुरू हुआ?

भारत में बजट और लाल रंग का संबंध सीधे ब्रिटिश शासन से जुड़ा है. ब्रिटेन में सदियों से सरकारी, कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों को लाल रंग के कवर में रखा जाता था. वहां लाल रंग को सत्ता, अधिकार और गंभीर फैसलों का प्रतीक माना जाता था. जब भारत में अंग्रेजों ने प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया, तो उन्होंने बजट जैसी अहम आर्थिक फाइलों के लिए भी उसी परंपरा को अपनाया. 

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कहां से शुरू हुई परंपरा?

भारत का पहला बजट 1860 में पेश किया गया था. उस समय देश पूरी तरह ब्रिटिश शासन के अधीन था और प्रशासनिक नियम भी अंग्रेजों के ही थे. तभी से बजट को लाल कवर या लाल ब्रीफकेस में रखने की परंपरा शुरू हुई. आजादी के बाद भी यह परंपरा दशकों तक चलती रही और लाल ब्रीफकेस बजट की पहचान बन गया.

लाल रंग का मतलब

बजट में लाल रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं चुना गया था. इसे जिम्मेदारी, शक्ति और गंभीरता का प्रतीक माना जाता है. बजट ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें देश की कमाई, खर्च, टैक्स, योजनाएं और आर्थिक दिशा तय होती है. ऐसे में लाल रंग यह संकेत देता था कि यह फाइल बेहद महत्वपूर्ण है और इससे जुड़े फैसले पूरे देश को प्रभावित करेंगे. 

आम लोगों के मन में बनी पहचान

समय के साथ लाल ब्रीफकेस सिर्फ सरकारी परंपरा नहीं रही, बल्कि आम लोगों की नजर में बजट का प्रतीक बन गया है. जैसे ही टीवी स्क्रीन पर वित्त मंत्री के हाथों में लाल फाइल दिखाई देती थी, लोगों को समझ आ जाता था कि बजट आने वाला है. यह रंग बजट से इतना जुड़ गया कि बिना लाल ब्रीफकेस के बजट की कल्पना करना भी मुश्किल लगने लगा.

2019 में टूटी सदियों पुरानी परंपरा

साल 2019 में पहली बार बजट की फाइल का रंग बदला गया. वित्त मंत्री ने लाल ब्रीफकेस की जगह एक लाल रंग के साधारण फोल्डर का इस्तेमाल किया. इसे औपनिवेशिक दौर की परंपराओं से बाहर निकलने का प्रतीक माना गया. सरकार का संदेश साफ था कि देश अब अपनी नीतियों और प्रतीकों को नए नजरिए से देख रहा है.

रंग बदला, लेकिन इतिहास नहीं

हालांकि अब बजट लाल ब्रीफकेस में नहीं आता, लेकिन लाल रंग का इतिहास आज भी बजट की कहानी का अहम हिस्सा है. यह रंग उस दौर की याद दिलाता है जब बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सत्ता और शासन का प्रतीक हुआ करता था, इसलिए आज भी बजट और लाल रंग का जिक्र होते ही लोगों की जिज्ञासा बढ़ जाती है. 

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