Border 2 Banned In Gulf Countries: जेपी दत्ता की सुपरहिट फिल्म बॉर्डर का सीक्वल बॉर्डर-2 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुका है. फिल्म में देशभक्ति, सैनिकों की कुर्बानी और भावनात्मक कहानी को एक बार फिर बड़े पर्दे पर दिखाया गया है. भारत में फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी शुरुआत मानी जा रही है, लेकिन इस फिल्म को खाड़ी देशों में बैन कर दिया गया है. आइए जानें कि इसे बैन करने की वजह क्या है और क्या भारत इसके खिलाफ शिकायत कर सकता है?

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खाड़ी देशों में क्यों लगा प्रतिबंध?

बॉर्डर-2 को गल्फ देशों में रिलीज की मंजूरी नहीं मिली है. इससे पहले भी धुरंधर जैसी फिल्मों को इसी तरह वहां बैन किया जा चुका है. दरअसल, खाड़ी देशों के अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक नियम होते हैं. अगर किसी फिल्म की कहानी, संवाद या दृश्य वहां के नियमों या संवेदनशील मुद्दों से टकराते हैं, तो स्थानीय सेंसर बोर्ड उसे दिखाने से रोक सकता है. हालांकि बॉर्डर 2 को लेकर कहा जा रहा है कि यह फिल्म पाकिस्तानी विरोधी है, इसीलिए खाड़ी देशों में बैन है.

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क्या भारत सरकार सीधे हस्तक्षेप कर सकती है?

जब किसी दूसरे देश में भारतीय फिल्म पर बैन लगता है, तो भारत सरकार सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. इसकी वजह यह है कि हर देश अपनी संप्रभुता के तहत फैसले लेता है. भारत किसी भी देश पर यह दबाव नहीं बना सकता कि वह अपने कानूनों के खिलाफ जाकर फिल्म रिलीज करे.

राजनयिक स्तर पर क्या किया जा सकता है?

हालांकि, भारत सरकार पूरी तरह हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठती है. विदेश मंत्रालय के जरिए संबंधित देश से कूटनीतिक बातचीत की जा सकती है. वहां स्थित भारतीय दूतावास बैन की वजह जान सकता है और बातचीत के माध्यम से फिल्म पर लगे प्रतिबंध को हटाने का अनुरोध कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला उसी देश की सरकार और सेंसर बोर्ड का होता है. 

निर्माताओं के पास क्या विकल्प हैं?

फिल्म के निर्माता या डिस्ट्रीब्यूटर उस देश के स्थानीय कानूनों के तहत कानूनी रास्ता अपना सकते हैं. अगर उन्हें लगता है कि प्रतिबंध गलत या भेदभावपूर्ण है, तो वे वहां की अदालत में अपील कर सकते हैं. इसके अलावा, स्थानीय सेंसर बोर्ड या उसकी अपील समिति के सामने भी दोबारा आवेदन किया जा सकता है.

खाड़ी देशों में पहले भी लग चुके हैं बैन?

यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय फिल्म को खाड़ी देशों में रोका गया हो. इससे पहले भी कई फिल्मों पर वहां प्रतिबंध लग चुका है. इन देशों में फिल्मों की जांच काफी सख्ती से की जाती है, ताकि कोई भी कंटेंट उनके सामाजिक ढांचे या राजनीतिक नजरिए के खिलाफ न जाए.

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