Nainar Nagendran Vijay Controversy: तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की मां के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करके राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. यह टिप्पणी चेन्नई में पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान की गई थी और इसकी राजनीतिक नेताओं और दूसरे लोगों द्वारा काफी ज्यादा आलोचना की गई है. लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अनादरपूर्ण बताया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक को भी एक शिकायत सौंपी गई है. यह विवाद अब राजनीति से काफी आगे बढ़ चुका है और सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसी टिप्पणी पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है और अगर हां, तो भारतीय न्याय संहिता के तहत भाजपा नेता को क्या सजा हो सकती है. आइए जानते हैं.

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विवाद कैसे शुरू हुआ? 

रिपोर्ट के मुताबिक यह विवाद मुख्यमंत्री विजय के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के विधानसभा चुनाव हारने के बाद उनके बेटे और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन परेशान करते हुए सदन में कहा था कि "तुम्हारे पिता कहां है?" इस टिप्पणी का जवाब देते हुए नैनार नागेंद्रन ने कथित तौर पर चेन्नई में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रम के दौरान कहा के अगर कुछ लोग अपने पिता को ढूंढ रहे हैं तो उन्हें घर जाकर अपनी माताओं से पूछना चाहिए कि उनके पिता कौन थे. 

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यह बयान तुरंत ही विवाद का विषय बन गया क्योंकि इसमें एक राजनीतिक नेता की मां को व्यक्तिगत राजनीतिक हमले में घसीटा गया. आलोचकों को ऐसा कहना है कि राजनीतिक असहमति सार्वजनिक नीति और राजनीतिक कामकाज पर केंद्रित होनी चाहिए और परिवार के सदस्यों के बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए.

क्या कहती है बीएनएस की धारा 79?

इस विवाद के संबंध में जिन प्रावधानों का हवाला दिया जा रहा है उनमें से एक भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 है. यह प्रावधान उन शब्दों, इशारों या फिर काम से जुड़ा हुआ है जिनका उद्देश्य किसी महिला की गरिमा का अपमान करना हो. मिली जानकारी के मुताबिक अगर कोई आरोपी इस प्रावधान के तहत दोषी पाया जाता है तो सजा 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकती है. 

हालांकि क्या यह प्रावधान असलियत में किसी खास बयान पर लागू होता है, यह तथ्य, शब्द, परिस्थिति और सबूत पर निर्भर करता है. सिर्फ शिकायत या आरोप से ही अपराध साबित नहीं हो जाता.

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क्या मानहानि के आरोप भी लग सकते हैं?

एक और प्रावधान जिस पर संभावित रूप से विचार किया जा सकता है वह है भारतीय न्याय संहिता की धारा 356. यह मानहानि से संबंधित है. अगर ऐसा पाया जाता है कि कोई बयान कानून के तहत आवश्यक इरादे या फिर जानकारी के साथ दिया गया था और वह कानूनी रूप से किसी पहचाने जा सकने वाले व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है तो आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू हो सकती है. 

ऐसे मामले में बताई गई सजा में 2 साल तक की जेल, जुर्माना, कम्युनिटी सर्विस या फिर कानून के मुताबिक इनका मिला जुला रूप शामिल हो सकता है. इस मामले में कानूनी सवाल यह होगा क्या कथित टिप्पणी से संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा को कोई नुकसान पहुंचा है और क्या मानहानि के जरूरी तत्व साबित होते हैं. 

धारा 352 के बारे में क्या? 

शिकायत से जुड़ी चर्चा में बताई गई तीसरी धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 है. यह जानबूझकर किए गए ऐसे अपमान से जुड़ी है जिससे शांति भंग होने का खतरा हो. अगर कानूनी जरूरतें पूरी होती हैं और हालात से शांति भंग करने का जरूरी इरादा या संभावना दिखती है तो सार्वजनिक रूप से दिए गए बयान पर यह धारा लागू हो सकती है.  इस मामले में 2 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं.

हालांकि हर भड़काऊ राजनीतिक बयान अपने आप अपराधिक अपराध नहीं बन जाता. अभियोजन पक्ष को इस धारा के तहत जरूरी तथ्य साबित करने होते हैं.

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