बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार क्या अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे? 5 मार्च 2026 की यह तारीख बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का गवाह बन सकती है. चर्चा है कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो न केवल बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा, बल्कि नीतीश कुमार की अपनी भूमिका, जिम्मेदारियां और यहां तक कि उनकी सैलरी और भत्तों का गणित भी पूरी तरह बदल जाएगा.
नीतीश कुमार की सैलरी बढ़ेगी या कम होगी?
बिहार के सियासी गलियारों में इन दिनों बस एक ही चर्चा है कि क्या 'सुशासन बाबू' अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे? सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और जदयू के बीच इस पर सहमति बनती दिख रही है, लेकिन इस बदलाव के साथ एक व्यावहारिक सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि एक मुख्यमंत्री और एक राज्यसभा सांसद की सुविधाओं और वेतन में क्या अंतर होता है?
वेतन का कितना अंतर?
2025-26 के वर्तमान वेतन ढांचे के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार को हर महीने लगभग 2.15 लाख रुपये से लेकर 2.6 लाख रुपये तक वेतन और विभिन्न भत्ते मिलते हैं. बिहार में हाल के वर्षों में विधायकों और मंत्रियों के वेतन में हुई बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा काफी सम्मानजनक है.
वहीं, अगर वे राज्यसभा सांसद बनते हैं, तो उनका मूल वेतन लगभग 1 लाख रुपये होगा. हालांकि, इसमें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय खर्च जैसे भत्ते जोड़ दिए जाएं, तो एक सांसद की कुल मासिक आय करीब 2.5 लाख से 2.8 लाख रुपये के बीच पहुंच जाती है. यानी मोटे तौर पर देखा जाए तो नकद वेतन के मामले में बहुत बड़ा घाटा नहीं होने वाला है, बल्कि भत्तों को मिलाकर यह आंकड़ा मुख्यमंत्री की सैलरी के लगभग बराबर या थोड़ा ज्यादा ही बैठ सकता है.
पेंशन का 'डबल' फायदा
नीतीश कुमार के मामले में सबसे दिलचस्प बात उनकी पेंशन है. वे लंबे समय तक विधायक (MLA/MLC) रहे हैं और पूर्व सांसद भी रह चुके हैं. नियमों के मुताबिक, एक पूर्व विधायक और पूर्व सांसद के रूप में उनकी संचित पेंशन काफी अधिक बैठती है. रिपोर्टों की मानें तो उनकी पेंशन ही करीब 2 लाख रुपये प्रति माह के आसपास हो सकती है. सांसद बनने के बाद भी उनकी सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाले ये वित्तीय लाभ उनके साथ बने रहेंगे.
सुविधाओं और प्रोटोकॉल में होगा बदलाव
सैलरी से इतर, सबसे बड़ा अंतर सुविधा और प्रोटोकॉल का है. मुख्यमंत्री के पास राज्य की पूरी मशीनरी होती है, Z+ सुरक्षा, विशाल मुख्यमंत्री आवास, और एक बड़ा आधिकारिक स्टाफ होता है. राज्यसभा सांसद बनने पर उन्हें दिल्ली में लुटियंस जोन में बंगला और सांसद स्तर की सुरक्षा मिलेगी, जो निश्चित रूप से एक मुख्यमंत्री के तामझाम से कम होगी. हालांकि, राजनीतिक रसूख के मामले में राज्यसभा जाना उनके लिए सम्मानजनक विदाई और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका का संकेत माना जा रहा है.
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