Mamata Banerjee Resignation: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह कहकर एक राजनीतिक बहस छेड़ दी है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने इस बात का आरोप लगाया है कि वे हारी नहीं हैं बल्कि उन्हें हराया गया है. हालांकि भारतीय राजनीति में ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी मुख्यमंत्री ने बढ़ते दबाव या फिर किसी दूसरी वजह से पद छोड़ने से इनकार किया हो. आइए जानते हैं कि इतिहास में ऐसा पहले कब हो चुका है.
अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा
सबसे हालिया उदाहरणों में से एक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का है. 2024 में कथित शराब नीति मामले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा ना देने का फैसला किया. आम आदमी पार्टी ने तर्क दिया कि संविधान में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जो किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को हिरासत में रहते हुए भी अपने पद पर बने रहने से रोकना हो. यह एक कानूनी लेकिन विवादास्पद रुख था.
बिहार में सत्ता संघर्ष
2015 में बिहार में जीतन राम मांझी से जुड़ा एक ऐसा ही राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला था. 2014 के लोकसभा चुनावों में JD(U) की हार के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था. इसके बाद 2015 में नीतीश कुमार वापस मुख्यमंत्री बनना चाहते थे मगर मांझी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें उन्हीं की पार्टी से निकाल दिया गया. काफी खींचतान के बाद फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले उन्होंने 20 फरवरी 2015 को इस्तीफा दे दिया.
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एच डी कुमारस्वामी का मामला
ऐसा ही कुछ मामला 2007 का भी है. यह मामला कर्नाटक में एच डी कुमारस्वामी से जुड़ा है. JD(S) और बीजेपी के बीच हुए सत्ता साझाकरण समझौते के तहत कुमारस्वामी को 20 महीने बाद मुख्यमंत्री का पद B.S.Yediyurappa को सौंपना था. जब वह समय सीमा आई तो उन्होंने सत्ता छोड़ने से साफ इनकार कर दिया. इसके चलते भाजपा ने अपना समर्थन वापस ले लिया. इसका नतीजा यह निकला कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया.
अब ममता बनर्जी वाले मामले में क्या होगा?
संवैधानिक रूप से यह स्थिति राजनीतिक बयानों से कम और संस्थागत समय सीमाओं से ज्यादा नियंत्रित होती है. 17वीं बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को खत्म हो जाएगा. इसके बाद सदन अपने आप ही भंग हो जाएगा. यानी कि इस्तीफा देने या फिर ना देने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता. विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही मुख्यमंत्री के तौर पर उनका पद अपने आप समाप्त हो जाएगा और साथ ही नई सरकार का गठन करना अनिवार्य हो जाएगा.
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