क्रिकेट में एक रन कई बार मैच की दिशा बदल देता है, लेकिन जब एक बल्लेबाज जानबूझकर आसान सिंगल लेने से मना कर दे और उसका खामियाजा दूसरे खिलाड़ी को आउट होकर भुगतना पड़े, तो सवाल उठना लाजमी है. बिग बैश लीग में स्टीव स्मिथ और बाबर आजम के बीच हुआ वाकया इसी बहस को जन्म दे गया. क्या यह सिर्फ रणनीति है या खेल भावना के खिलाफ? और ऐसे हालात में ICC के नियम क्या कहते हैं, आइए विस्तार से समझते हैं.

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बिग बैश लीग का विवाद कैसे शुरू हुआ?

शुक्रवार को बिग बैश लीग में सिडनी थंडर के खिलाफ 190 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए स्टीव स्मिथ और बाबर आजम ने पहले विकेट के लिए 141 रन जोड़े. स्मिथ तेजी से रन बना रहे थे, जबकि बाबर का स्ट्राइक रेट धीमा रहा. इसी दौरान एक ऐसा मौका आया, जब स्मिथ ने आराम से लिया जा सकने वाला सिंगल लेने से मना कर दिया. अगली ही गेंद पर बाबर आउट हो गए और गुस्से में उन्होंने बाउंड्री लाइन पर बल्ला मार दिया. यहीं से सवाल उठा कि अगर एक बल्लेबाज सहयोग न करे, तो दूसरा खिलाड़ी क्या कर सकता है?

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क्या सिंगल न लेना नियमों का उल्लंघन है?

क्रिकेट के नियमों के मुताबिक सिंगल न लेना अपने आप में कोई अपराध नहीं है. यह बल्लेबाज की रणनीति का हिस्सा माना जाता है. ICC के नियम यह मानते हैं कि हर खिलाड़ी को अपनी बल्लेबाजी शैली और सोच के मुताबिक खेलने की आजादी है. इसलिए सीधे तौर पर कोई बल्लेबाज यह शिकायत नहीं कर सकता कि उसका साथी रन क्यों नहीं ले रहा है. 

अंपायर से कब बात की जा सकती है?

हालांकि अगर कोई खिलाड़ी बार-बार जानबूझकर सिंगल लेने से मना करता है और इससे खेल भावना को नुकसान पहुंचता दिखे, तो दूसरा बल्लेबाज अंपायर से बात कर सकता है. अंपायर उस स्थिति को नोटिस करते हैं और अगर उन्हें यह व्यवहार अनुचित लगता है, तो वे ‘डेड बॉल’ कॉल कर सकते हैं. यह फैसला पूरी तरह अंपायर के विवेक पर निर्भर करता है.

टीम के अंदर समाधान का रास्ता

मैच के दौरान या उसके बाद खिलाड़ी अपने साथी से सीधे बात कर सकता है. इसके अलावा वह कोच या टीम मैनेजमेंट को भी इस बारे में बता सकता है. अक्सर ऐसी बातें टीम मीटिंग में उठाई जाती हैं ताकि भविष्य में तालमेल बेहतर बनाया जा सके, क्योंकि बल्लेबाजी साझेदारी में भरोसा और समझ सबसे अहम होती है. 

ICC की आचार संहिता क्या कहती है?

ICC की कोड ऑफ कंडक्ट के तहत अगर कोई व्यवहार खेल भावना के खिलाफ माना जाता है, तो उसे ‘अनुचित व्यवहार’ की श्रेणी में रखा जा सकता है. अंपायर इस घटना की रिपोर्ट मैच रेफरी को भेजते हैं. इसके बाद रेफरी जांच करता है कि मामला किस स्तर का उल्लंघन है.

क्या हो सकती है सजा?

अगर मामला लेवल 1 का माना गया, तो खिलाड़ी पर मैच फीस का कुछ हिस्सा जुर्माने के रूप में लग सकता है. गंभीर मामलों में जुर्माना बढ़ सकता है या मैचों का प्रतिबंध भी लग सकता है. हालांकि सिर्फ सिंगल न लेने पर सीधे बैन लगना बहुत दुर्लभ है, जब तक उसमें जानबूझकर अनफेयर प्ले साबित न हो.

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