Bankipur Datia By Election Results 2026: बांकीपुर और दतिया में हुए उपचुनावों के बाद मतगणना जारी है. चुनाव आयोग के आंकड़ों को देखें तो दोनों ही सीटों पर बड़ा उलटफेर होता दिखाई दे रहा है. बांकीपुर में जहां जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं तो वहीं दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह बीजेपी प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. 

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वैसे तो किसी भी उपचुनाव में जीत किसी एक प्रत्याशी की ही होती है, लेकिन क्या हो अगर किसी सीट पर नोटा (NOTA) को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं? बता दें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2013 से चुनाव आयोग ने NOTA विकल्प को शुरू किया था. चुनाव आयोग ने नोटा को लेकर भी नियम स्पष्ट किए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि अगर किसी चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को जीत न मिले और नोटा पर सबसे ज्यादा वोट पड़ जाएं तो ऐसी स्थिति में क्या होगा और क्या चुनाव आयोग यहां दोबारा चुनाव कराएगा? 

NOTA जीतने पर क्या होता है?

इसके लिए हमें सबसे पहले भारत के चुनाव आयोग के मुख्य नियम को समझना जरूरी है. भारतीय चुनाव आयोग के नियम 64 के प्रावधानों के अनुसार देश के ज्यादातर राज्यों में फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम काम करता है. इसका मतलब है कि उम्मीदवारों में से जिसे भी सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, वही विजेता माना जाएगा. इस नियम के मुताबिक, नोटा को एक काल्पनिक उम्मीदवार माना जाता है. अगर किसी सीट पर नोटा को 50,000 वोट मिलते हैं और दूसरे नंबर पर मौजूद असली उम्मीदवार को केवल 40,000 वोट मिलते हैं, तो भी नोटा को विजेता नहीं घोषित किया जाता. चुनाव आयोग नोटा के वोटों को छोड़कर बाकी बचे वोटों की गिनती करता है. ऐसे में 40,000 वोट पाने वाले असली उम्मीदवार को ही चुनाव का विजेता घोषित कर दिया जाता है और वही विधायक बन जाता है. 

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कुछ राज्यों में बदल चुका है नियम

भले ही पूरे देश के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर वाले के जितने का नियम हो, लेकिन भारत के कुछ राज्यों ने स्थानीय चुनावों में इस नियम को बदल दिया है. हरियाणा और महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयोगों ने अपने स्थानीय चुनावों के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया था. वहां के नियम के मुताबिक, अगर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, तो उस चुनाव को रद्द कर दिया जाता है. इसके बाद वहां दोबारा चुनाव कराया जाता है. साथ ही इन नियमों में यह भी शर्त जोड़ी गई है कि दोबारा होने वाले चुनाव में पुराने किसी भी उम्मीदवार को दोबारा टिकट नहीं दिया जा सकता. राजनीतिक दलों को बिल्कुल नए उम्मीदवार उतारने पड़ते हैं. फिलहाल यह नियम देश के लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर लागू नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से यह मांग उठ रही है कि अगर किसी विधानसभा सीट में नोटा जीते, तो वहां का चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव होने चाहिए. 

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