Balochistan Independence: पाकिस्तान से आजादी की प्रतीकात्मक घोषणा करने वाले बलूच अलगाववादी समूहों की वजह से बलूचिस्तान एक बार फिर से चर्चा में आ चुका है. हालांकि इस घोषणा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी मानता नहीं मिली है और इससे इलाके की कानूनी स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं आया है, लेकिन इसने दक्षिण एशिया के सबसे लंबे समय से चल रहे विद्रोह में से एक पर फिर से ध्यान खींचा है. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन के लिए बलूचिस्तान इतना जरूरी क्यों है.
पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान क्यों जरूरी ?
बलूचिस्तान रणनीतिक रूप से काफी अहम जगह पर स्थित है और इसकी सीमा ईरान और अफगानिस्तान दोनों से मिलती है. इससे पाकिस्तान को मध्य एशिया, मध्य पूर्व और अरब सागर को जोड़ने वाले व्यापारिक मार्गों तक सीधी पहुंच मिलती है. इससे यह प्रांत देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का एक बड़ा और जरूरी हिस्सा बन जाता है.
इस प्रांत में प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा और कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन काफी ज्यादा मौजूद हैं. ये भंडार पाकिस्तान के ऊर्जा और खनन क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा अरब सागर के साथ बलूचिस्तान की लंबी तट रेखा पाकिस्तान को समुद्री पहुंच और रणनीतिक गहराई देती है.
चीन के लिए बलूचिस्तान क्यों जरूरी?
चीन बलूचिस्तान को रणनीतिक रूप से इस वजह से जरूरी मानता है क्योंकि बलूचिस्तान बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के तहत प्रमुख परियोजनाओं में से एक चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की आधारशिला है. इस गलियारे के केंद्र में ग्वादर बंदरगाह है. इस बंदरगाह को बीजिंग अरब सागर के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार मानता है.
यह रास्ता चीन को मलक्का स्ट्रेट का एक विकल्प देता है. इससे होकर अभी उसकी ऊर्जा का इंपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है.
क्यों है संघर्ष?
दरअसल बलूच राष्ट्रवादी समूह द्वारा उठाई गई मुख्य शिकायत में से एक प्रांत के बड़े खनिज संपदा का कथित शोषण है. उनका यह तर्क है कि बलूचिस्तान में बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा और दूसरे संसाधन होने के बावजूद इनसे होने वाला आर्थिक फायदा ज्यादातर पाकिस्तान की केंद्र सरकार और ज्यादा विकसित प्रांतों को मिलता है. इन आरोपों के मुताबिक पाकिस्तान के संसाधन समृद्ध इलाकों में से एक में रहने के बावजूद स्थानीय समुदाय खराब बुनियादी ढांचे, काफी कम सार्वजनिक सेवाओं और सीमित आर्थिक अवसरों से जूझ रहा है.
इसी के साथ चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर कई समूहों को यह डर है कि यह प्रोजेक्ट बलूचिस्तान की जनसांख्यिकीय और आर्थिक संरचना को बदल देगा. आलोचकों का यह तर्क है कि स्थानीय निवासियों को रोजगार के पर्याप्त अवसर या फिर प्रोजेक्ट से होने वाले फायदे में उचित हिस्सा नहीं मिला है।
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