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Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर के पुजारी को कितनी मिलती है सैलरी, कैसे होता है इनका सेलेक्शन?

Ayodhya Ram Mandir: श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दान पात्र से चढ़ावे की राशि चोरी होने के मामले में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि मंदिर के पुजारी को कितना वेतन दिया जाता है.

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  • अयोध्या राम मंदिर दानपात्र चोरी पर एसआईटी जांच मंजूरी।
  • मुख्य पुजारी को 38,500 रुपये मासिक वेतन, अन्य सुविधाएं।
  • गुरुकुल शिक्षा, रामानंदी दीक्षा जैसी कड़ी पात्रता अनिवार्य।
  • बहु-चरणीय चयन, गहन प्रशिक्षण उपरांत होती है नियुक्ति।

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर भारत के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक है. मंदिर में लाखों भक्तों के आने और दैनिक पूजा के लिए व्यवस्था के साथ पुजारी की भूमिका काफी ज्यादा प्रतिष्ठित मानी जाती है. हाल ही में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दान पात्रों से चढ़ावे की राशि चोरी होने से जुड़ी चर्चाओं पर ध्यान देते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने एक काफी सख्त रुख अपनाया है. दरअसल मंदिर के ट्रस्ट द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई एसआईटी जांच की मांग को लेकर सरकार ने मंजूरी दे दी है.  इसी बीच आइए जानते हैं कि मंदिर के पुजारी को कितना वेतन दिया जाता है और उनकी चयन की प्रक्रिया क्या है.

कितना वेतन मिलता है पुजारियों को?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समय-समय पर पुजारी और मंदिर कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा और संशोधन करता है. राम मंदिर के मुख्य पुजारी को लगभग ₹38,500 प्रति माह वेतन मिलता है. सहायक पुजारी को उनकी जिम्मेदारियां और अनुभव के आधार पर हर महीने ₹33,000 और ₹36,300 के बीच भुगतान किया जाता है. पुजारी के अलावा कोठारी और भंडारी जैसे प्रबंधन कर्मचारियों को हर महीने ₹19,000 से लेकर ₹24,000 तक वेतन मिलता है. 

कुछ अतिरिक्त सुविधाएं

पुजारियों को उनके मासिक वेतन के अलावा सरकारी कर्मचारियों के समान कई सुविधाएं दी जाती हैं. इसमें मुफ्त आवास, भोजन, चिकित्सा सुविधा और छुट्टी के प्रावधान शामिल हैं. ऐसी व्यवस्था इस बात को पक्का करती है कि पुजारी खुद को धार्मिक कर्तव्य और मंदिर अनुष्ठानों के लिए पूरी तरह समर्पित कर सके. 

प्रशिक्षण के दौरान वजीफा 

पुजारी प्रशिक्षण के लिए चुने गए उम्मीदवारों को तुरंत स्थायी पदों पर नियुक्त नहीं किया जाता. 6 महीने की प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रशिक्षुओं को ₹2000 का मासिक वजीफा मिलता है. ट्रस्ट पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुफ्त भोजन और आवास भी प्रदान करता है. 

पुजारी बनने के लिए पात्रता मानदंड 

ट्रस्ट ने आवेदकों के लिए सख्त पात्रता मानक स्थापित किए हैं. उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल या फिर वैदिक संस्थान से पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा प्राप्त होनी चाहिए. वैदिक शास्त्रों, अनुष्ठानों और धार्मिक परंपराओं का मजबूत ज्ञान जरूरी माना जाता है. आवेदन के समय आवेदकों की उम्र 20 से 30 साल के बीच होनी चाहिए.

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धार्मिक दीक्षा जरूरी 

इसी के साथ उम्मीदवारों को रामानंदी संप्रदाय में दीक्षित होना चाहिए और वैष्णव परंपराओं का पालन करना चाहिए. यह शर्त इस बात को पक्का करती है कि पुजारी राम मंदिर में अपनाई जाने वाली धार्मिक प्रथाओं और आध्यात्मिक परंपराओं से अच्छी तरह से वाकिफ हो.

बहु चरणीय चयन प्रक्रिया 

भर्ती तब शुरू हो जाती है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक आधिकारिक विज्ञापन जारी करके आवेदन आमंत्रित करता है. प्रतिक्रिया अक्सर जबर्दस्त होती है, हजारों उम्मीदवार सीमित संख्या में पदों के लिए आवेदन करते हैं. 

पहले चरण में शैक्षणिक योग्यता, धार्मिक प्रशिक्षण और दूसरे पात्रता मानदंडों के आधार पर आवेदनों की जांच की जाती है. सिर्फ शॉर्ट लिस्ट किए गए उम्मीदवार ही चयन प्रक्रिया के दूसरे चरण में आगे बढ़ते हैं. 

चयनित उम्मीदवार देश के अलग-अलग हिस्सों के प्रसिद्ध संत, वैदिक विद्वान और आचार्यों के एक पैनल के सामने मौजूद होते हैं. इस दौरान उम्मीदवारों का मूल्यांकन वेदों, उपनिषदों, कर्मकांड अनुष्ठानों के उनके ज्ञान और उनके संस्कृत उच्चारण की सटीकता पर किया जाता है. धार्मिक प्रथाओं के बारे में उनकी समझ और मंदिर अनुष्ठान करने की क्षमता का भी मूल्यांकन किया जाता है. 

इसके बाद उम्मीदवारों को 6 महीने के गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है. इसमें उन्हें रामलाल की पूजा प्रक्रिया, संध्या वंदन, मंदिर के अनुष्ठान और मंदिर में आयोजित अलग-अलग धार्मिक समारोह में व्यावहारिक निर्देश प्राप्त होते हैं. इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही उम्मीदवारों को सहायक पुजारी के रूप में नियुक्त किया जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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