Assembly Elections 2026: पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद राजस्थान के फलोदी सट्टा बाजार ने भविष्यवाणी की है. फलोदी सट्टा बाजार के मुताबिक पश्चिम बंगाल में सत्ता की हवा इस बार बदल सकती है. लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर देश में सबसे बड़ा सट्टा बाजार कौन सा है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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फलोदी सट्टा बाजार 

फलोदी शहर को अक्सर बुकियों का शहर कहा जाता है. यहां का सट्टेबाजी सिस्टम टेक्नोलॉजी पर कम बल्कि इंसानी सूझ-बूझ और दशकों पुराने नेटवर्क पर ज्यादा चलता है. इस बाजार की जड़ें 19वीं सदी तक फैली हुई हैं. दरअसल यहां के स्थानीय लोग बारिश और खेती-बाड़ी के नतीजे पर दांव लगाते थे. उन इलाकों में दांव ज्यादा लगाए जाते थे जहां सूखा पड़ने का ज्यादा खतरा रहता था. वक्त के साथ यह सट्टेबाजी राजनीति और चुनावों से जुड़ गई.

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फलोदी की सबसे खास बात यह है कि इसका जमीनी स्तर का इंटेलिजेंस नेटवर्क काफी मजबूत है. बुकी लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में फैले अपने मुखबिरों पर भरोसा करते हैं. ताकि उन्हें पल-पल की जानकारी मिल सके. इसमें जातिगत समीकरणों से लेकर रैली में जुटी भीड़ और वोटरों के मूड तक की बातें शामिल होती हैं. यहां सौदे अक्सर जुबानी होते हैं और फोन पर कोड वाली भाषा में किए जाते हैं.

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मुंबई और दिल्ली 

जहां एक तरफ फलोदी पारंपरिक तरीकों पर चलता है वहीं मुंबई और दिल्ली जैसे शहर सट्टेबाजी के ज्यादा संगठित और टेक्नोलॉजी पर आधारित माहौल को दिखाते हैं . मुंबई ऐतिहासिक रूप से 1950 के दशक से मटका जुए का गढ़ रहा है.  यह शहर अब क्रिकेट सट्टेबाजी और ऑनलाइन दांव लगाने का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.

आज इन बड़े शहरों के सट्टेबाजी बाजार अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म से काफी हद तक जुड़े हुए हैं. यहां के दांव अक्सर दुनिया भर की सट्टेबाजी वेबसाइटों से मेल खाते हैं. खासकर क्रिकेट मैच और बड़े खेल आयोजनों के दौरान. टेक्नोलॉजी, डिजिटल पेमेंट और दुनिया भर से जुड़ाव ने  इन बाजारों का दायरा पारंपरिक तरीकों वाले बाजारों के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा कर दिया है.

भारत का सट्टेबाजी बाजार कितना बड़ा है? 

गैरकानूनी होने के बावजूद भी भारत का सट्टेबाजी उद्योग काफी बड़ा है. अनुमानों के मुताबिक इस बाजार का आकार हर साल 130 अरब डॉलर से 150 अरब डॉलर के बीच है. इसका एक बड़ा हिस्सा अब ऑनलाइन चलता है. इसमें महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य डिजिटल सट्टेबाजी की गतिविधि के लिए बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं.

सबसे बड़ा बाजार कौन सा? 

अगर पारंपरिक तरीके से देखें तो कोई एक सबसे बड़ा बाजार नहीं है.  राजनीतिक सट्टेबाजी की विश्वसनीयता और विरासत के मामले में फलोदी का दबदबा है और मुंबई-दिल्ली मात्रा, तकनीक और वैश्विक पहुंच के मामले में आगे हैं.

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