बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लाखों फैंस को चौंका दिया है. मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह ने हाल ही में प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का ऐलान किया है. सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि वह अब फिल्मों के लिए गाने नहीं गाएंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह संगीत से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि अब स्वतंत्र और रचनात्मक संगीत पर ध्यान देंगे. अरिजीत के इस फैसले के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है कि आखिर प्लेबैक सिंगिंग क्या होती है और इसका फिल्मी दुनिया में क्या महत्व है.

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क्या होती है प्लेबैक सिंगिंग, जान लीजिए

दरअसल, प्लेबैक सिंगिंग फिल्मों में गाने गाने की वह परंपरा है, जिसमें गायक पहले स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करता है और बाद में उस गाने पर अभिनेता या अभिनेत्री परदे पर अभिनय करते हैं. यानी स्क्रीन पर दिखने वाला कलाकार असल में गा नहीं रहा होता, बल्कि उसके होंठ पहले से रिकॉर्ड की गई आवाज के साथ तालमेल बैठाते हैं, इसी प्रक्रिया को प्लेबैक सिंगिंग कहा जाता है.

दशकों पुरानी है इसकी परंपरा

भारतीय सिनेमा में प्लेबैक सिंगिंग की परंपरा दशकों पुरानी है. इसकी शुरुआत उस दौर में हुई जब फिल्मों में तकनीकी सीमाएं थीं और हर अभिनेता अच्छा गायक नहीं होता था. ऐसे में प्रशिक्षित गायकों की आवाज का इस्तेमाल किया जाने लगा. समय के साथ यह परंपरा इतनी मजबूत हो गई कि प्लेबैक सिंगर्स खुद स्टार बन गए. लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, आशा भोसले जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों के सितारों को पहचान दिलाई.

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अरिजीत के फैसले से दुखी हैं फैंस

आधुनिक दौर में अरिजीत सिंह प्लेबैक सिंगिंग का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं. “तुम ही हो”, “चन्ना मेरेया”, “अगर तुम साथ हो”, “शायद” जैसे गानों ने न सिर्फ फिल्मों को हिट बनाया, बल्कि अरिजीत की आवाज को हर दिल तक पहुंचा दिया. यही वजह है कि उनके प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने की खबर इतनी बड़ी मानी जा रही है. उनके इस फैसले से अरिजीत सिंह के फैंस काफी नाखुश और उदास हैं.

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